Hindi NewsBihar NewsSitamarhi NewsGrand Swadeshi Mela in Sitamarhi from December 22-29 to Promote Local Production
22 से 29 दिसंबर तक लगेगा स्वदेशी मेला, 15 राज्यों से आएंगी सौ से अधिक प्रदर्शनियां

22 से 29 दिसंबर तक लगेगा स्वदेशी मेला, 15 राज्यों से आएंगी सौ से अधिक प्रदर्शनियां

संक्षेप:

सीतामढ़ी में 22 से 29 दिसंबर तक स्वदेशी मेला आयोजित किया जाएगा। यह मेला स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और स्वदेशी वस्तुओं के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से है। मेले में 15 राज्यों से 100 से अधिक प्रदर्शनियाँ शामिल होंगी, जिसमें विभिन्न विभागों के उत्पाद भी प्रदर्शित होंगे।

Sat, 29 Nov 2025 06:15 PMNewswrap हिन्दुस्तान, सीतामढ़ी
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सीतामढ़ी। स्वदेशी जागरण मंच की ओर से सीतामढ़ी में इस वर्ष 22 से 29 दिसंबर तक भव्य स्वदेशी मेला का आयोजन किया जाएगा। शुक्रवार को मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि मंच पिछले 34 वर्षों से देशभर में हजारों स्वदेशी मेलों के माध्यम से स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और स्वदेशी वस्तुओं के प्रति जन-जागरूकता का अभियान चला रहा है। उन्होंने कहा कि अब ज़रुरत है कि गाँव-गाँव में उत्पादन केंद्र विकसित हों और नागरिक स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें। मेले में देशभर के 15 राज्यों से 100 से अधिक प्रदर्शनियाँ शामिल होंगी। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, नमामि गंगे, स्वयं सहायता समूह एवं आजीविका मिशन से जुड़े उत्पाद भी प्रदर्शित होंगे।

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आयोजन श्री राधा कृष्ण गोयनका महाविद्यालय परिसर में होगा, जिसका भूमि-पूजन 13 दिसंबर को अपराह्न 2:30 बजे किया जाएगा। स्वदेशी मेला आयोजन समिति का किया गया गठन: स्वदेशी मेला आयोजन समिति भी गठित कर दी गई है। संगीता झा को मेला संयोजक, डॉ. देवेश कुमार को सचिव एवं प्रमोद शर्मा, आलोक कुमार, अवध किशोर को सह संयोजक बनाया गया है। वहीं महेंद्र प्रसाद एवं शुभम झा सह सचिव होंगे। रवि शंकर चौधरी को सीता स्वदेश कीर्ति, रघुवंश प्रसाद को स्थल सचिव, अग्नेय कुमार को प्रचार प्रमुख और रागिनी सिंह तथा रामा मिश्रा को सांस्कृतिक प्रमुख की ज़िम्मेदारी दी गई है। बैठक में आयुष आदित्य, सपना कुमारी, मधु कुमारी, अभिनव सिंह, रूपेश कुमार, कृष्णनंदन यादव सहित बड़ी संख्या में स्वदेशी कार्यकर्ता उपस्थित थे। आयोजकों ने बताया कि मेला स्थानीय उद्यमियों, कारीगरों और ग्रामीण उत्पादन को नई पहचान देने का बड़ा अवसर बनेगा।