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14 अगस्त, 2020|10:00|IST

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सीतामढ़ी में नाव के सहारे बाढ़ पीड़ितों कट रही जिंदगी

सीतामढ़ी में नाव के सहारे बाढ़ पीड़ितों कट रही जिंदगी

1 / 2शहर मे तंबू तानकर शरण लिये बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश आफत बनती जा रही है। तंबू में रखे सभी सामग्रियां भींगकर बर्वाद हो गया है। यहां कुदरत बारिश आफत बनाकर बरसा रही हैं। लखनदेई नदी उफनाई गई है। इससे शहर...

सीतामढ़ी में नाव के सहारे बाढ़ पीड़ितों कट रही जिंदगी

2 / 2शहर मे तंबू तानकर शरण लिये बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश आफत बनती जा रही है। तंबू में रखे सभी सामग्रियां भींगकर बर्वाद हो गया है। यहां कुदरत बारिश आफत बनाकर बरसा रही हैं। लखनदेई नदी उफनाई गई है। इससे शहर...

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शहर मे तंबू तानकर शरण लिये बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश आफत बनती जा रही है। तंबू में रखे सभी सामग्रियां भींगकर बर्वाद हो गया है। यहां कुदरत बारिश आफत बनाकर बरसा रही हैं। लखनदेई नदी उफनाई गई है। इससे शहर के निचले के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कुष्ठ कॉलनी, वार्ड 24 स्थित पुरुषोत्तम नगर, कृष्णा नगर के करीब 350 परिवार वाले घर छोड़ अन्यत्र उंचे स्थान पर शरण लिये हुये हैं। इसमें अत्यधिक गरीब तपके लोग रेलवे ट्रैक, रिंग बांध, रेलवे पश्चिमी गुमटी के दोनों तरफ सड़क किनारे त्रिपाल व प्लास्टिक का तंबू तान शरण लेने को विवश हैं। लगातार घनघोर बारिश तंबू के रखे समान को बर्वाद कर दिया। शहर के रेलवे ट्रैक किराने तंबू तान कर शरण लिये कुष्ठ कॉलनी के आशा देवी, सुनील मंत्री, गोविन्द राम, अरविन्द राम, राम कुमार मंडल आदि कहते हैं कि बीते एक पखवारा से तीन बार नदी में बाढ़ आयी है। प्रशासन के उदासीनता से बारिश के कारण घर में थोड़ा पानी घटा तो घर वापस चले जाते है। फिर पानी आने पर लौटना पड़ता है। अबतक तंबू से तीन बार घर जा चुके हैं। लोग बताते हैं कि तंबू में आफत की बारिश और घर में पानी है। हम लोग जाएं तो जाएं कहा। लालो देवी बताती है कि बाढ़ और बारिश जिल्लत भरी जिन्दगी जीने को मजबूर कर दिया। सरकारी कोई सुविधा नहीं मिल रही है।

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  • Web Title:Flood victims are killing lives in Sitamarhi by boat