होली: अबीर-गुलाल व पिचकारी से सजे बाजार, चहल-पहल बढ़ी
सीतामढ़ी में होली का पर्व नजदीक आ रहा है। बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है, जहाँ कपड़े, रंग और पिचकारियों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। विशेष रूप से हर्बल गुलाल की मांग बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी होली की रौनक दिखाई दे रही है। सभी रंगों की बौछार का इंतजार कर रहे हैं।

सीतामढ़ी। रंगों और उमंग का पर्व होली अब सिर पर है। महज दो दिन शेष रहने के साथ ही शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक के बाजार पूरी तरह होली के रंग में रंग गए हैं। हर ओर चहल-पहल बढ़ गई है और दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। कपड़ा बाजार, रंग-अबीर की दुकानें और पिचकारी के ठेले ग्राहकों से गुलजार हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में कुर्ता-पायजामा, टी-शर्ट, बच्चों के परिधान और महिलाओं के रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर खास रौनक देखी जा रही है। युवा वर्ग डिजाइनर और रंग-बिरंगे कुर्ता-पायजामा की तलाश में है। दुकानदार रमेश प्रसाद और विकास कुमार ने बताया कि ग्राहकों की पसंद को देखते हुए इस बार विशेष रूप से हर्बल गुलाल मंगाया गया है।
जिससे वचा को नुकसान न पहुंचे। बच्चों के लिए कार्टून प्रिंट वाली पिचकारी, टैंक वाली पिचकारी व बैलून पिचकारी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। व्यापारियों को उम्मीद है कि होली के पूर्व संध्या तक बिक्री व तेज होगी। कुल मिलाकर, बाजारों में उमंग, उत्साह और रंगों की छटा ने त्योहार के आगमन का संकेत दे दिया है। सभी दो दिन बाद रंगों की बौछार में सराबोर होने का इंतजार है। ग्रामीण हाट-बाजारों में भी दिखी होली की रौनक : शहर ही नहीं, ग्रामीण इलाकों के हाट-बाजारों में भी होली की रौनक साफ दिख रही है। गांवों में रंग-अबीर, गुलाल और कपड़ों की दुकानें सज गई हैं। ग्रामीण परिवार सामूहिक रूप से बाजार पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं। छोटे दुकानदारों के लिए यह पर्व अतिरिक्त आय का अवसर लेकर आया है। हाट में पिचकारी, टोपी और रंगीन चश्मों की बिक्री भी बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक परिधानों की मांग अधिक देखी जा रही है। त्योहार को लेकर हर वर्ग में उत्साह का माहौल है।
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