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24 नवंबर, 2020|12:47|IST

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बाढ़ के पानी में बर्बाद हो रही धान की फसल देख किसानों की फट रही छाती

बाढ़ के पानी में बर्बाद हो रही धान की फसल देख किसानों की फट रही छाती

1 / 2जिले में आफत की बारिश और बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा है। धान की फसल के लिए वरदान साबित होने वाली बारिश किसानों पर कहर बरपा रही...

बाढ़ के पानी में बर्बाद हो रही धान की फसल देख किसानों की फट रही छाती

2 / 2जिले में आफत की बारिश और बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा है। धान की फसल के लिए वरदान साबित होने वाली बारिश किसानों पर कहर बरपा रही...

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जिले में आफत की बारिश और बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा है। धान की फसल के लिए वरदान साबित होने वाली बारिश किसानों पर कहर बरपा रही हैं।

जिले में दूसरी बार आयी बाढ़ के पानी में लगभग 50 प्रतिशत धान की फसल डूब गई है। जिले में 90 हजार हेक्टेयर धनरोपनी का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें 90 प्रतिशत धन रोपनी तो कर ली गई हैं। लेकिन, बाढ़ के पानी में गलकर बर्बाद हो रही धान की फसल को देख किसानों की छाती फट रही है। डुमरा के कामेश्वर सिंह ने बताया कि हजारों रुपये खर्च कर लहालहाती धान की फसल का सपना देख रहे किसान अचानक बर्बाद धान की फसल देख रहे हैं। लखनदेई व अधवारा समूह की नदियां में आयी बाढ़ ने सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूब गई है। हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। सुप्पी प्रखंड के किसान इंदल राय बताते है कि 10 एकड़ धान की खेती की है। जिसमें लगभग चार एकड़ धान की फसल बाढ़ के पानी में डूबकर बर्बाद हो रही है। वहीं रामनरेश यादव ने बताया कि लगभग छह एकड़ धान की फसल पानी में डूबी है। हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। आशा थी कि इस बार मानसून पहले आने से अच्छी पैदावार होगा। लेकिन, नदियों की उफान से आयी बाढ़ के पानी में डूबकर फसल बर्बाद हो रही है। फिर से रोपनी के लिए खेत में बिचड़ा भी उपलब्ध नहीं है। जिसे धान की फसल फिर से लगायी जाएगी। रून्नीसैदपुर के किसान श्रवण कुमार, विनय कुमार व विकास कुमार ने बताया कि हजार रुपये खर्च कर धान की रोपनी कराये थे। वह फसल लगभग पांच से सात दिनों से पानी में डूबी है। दिन को कड़ी धूप निकल रही और बारिश हो रही है। जिससे फसल गलकर बर्बाद हो रही है। इस प्रकार मुरादपुर पंचायत के जयमंगल सिंह ने बताया कि धान की फसल के साथ इलाके में लगी 20 एकड़ साग-सब्जी की फसल बाढ़-बरसात के पानी में डूबकर बर्बाद हो गई है।

कम अवधि वाले लगाए बिचड़ा

कृषि वैज्ञानिक रामईश्वर प्रसाद ने बताया कि जिन बाढ़ प्रभावित इलाके में धान की फसल डूब गई है। फसल बर्बाद हो रही है। वैसे इलाके के किसान बचे हुए बिचड़ा को उखाड़कर दोगुना क्षेत्र में बिचड़ा को लगा दे। ताकि उसकी गुणवत्ता बचा रहे है। खेत से पानी निकलने के बाद फिर उसे खेत में लगा दे।

कम अवधि वाले लगा सकते है नर्सरी

जिन किसानों के पास बिचड़ा उपलब्ध नहीं है। वे उंचे स्थल पर कम अवधि वाले धान की नर्सरी लगाए। जैसे पूसा-5, राजेंन्द्र सुवासनी, राजेन्द्र स्वेता की नर्सरी लगाने के लिए बुआई करें। यह बिचड़ा 25 से 30 दिनो में तैयार हो जाएगा। 105 दिन खेत में रहकर फसल तैयार होती है। इसका उत्पादन भी बेहतर होता है। उन्होंने बताया कि साग-सब्जी की खेतों से पानी निकासी की व्यवस्था करें। रोग से बचाव के लिए किसान सलाहकार से संपर्क कर उचित दवा का प्रयोग करें।

धान की फसल हो रही बर्बाद

रुन्नीसैदपुर। मुसलाधार बारिश बाढ से प्रखंड क्षेत्र के निचले इलाके जलमग्न हो गया है। जिससे खेतों में लगी फसल बर्बाद हो गया है। प्रखंड के अथरी, रैनविशुनी, मानिकचौक पश्चिमी, मानिक चौक दक्षिणी, सैदपुर, सिरखिरिया, बरहेता, बलुआ,गिद्धा फुलवरिया, महिन्दवारा, देवनाबुजुग्ॉ गंगवारा बुजुर्ग, बुलंदपुर, ओलिपुर, गुरुदह उर्फ गौसनगर, मधौलसानी, महेशाफरकपुर समेत दो दर्जन पंचायतों में लगी फसल बर्बाद हो गई है। वहीं निचले इलाके के घरों में भी पानी प्रवेश कर गया है।

बाढ़ प्रभावित को मिलना है लाभ

सीतामढ़ी। डीएओ ने बताया कि बाढ़ से फसल (सिंचित) बर्बाद होने पर किसानों को 13 हजार पांच सौ रुपये प्रति हेक्टेयर देने का प्रावधान हैं। वहीं असिंचित फसल के लिए छह हजार पांच सौ रुपये का प्रावधान है। बाढ़ का पानी हटने के बाद सर्वेक्षण करवाया जाएगा।

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  • Web Title:Farmers bursting chest after seeing paddy crop being destroyed in flood water