Sitamarhi News: जीविका मॉडल पर हुआ बकरी पालक सहकारी समितियों का गठन
Sitamarhi News: सीतामढ़ी जिले में बकरी पालन को संगठित और लाभकारी स्वरोजगार बनाने के लिए सहकारी समितियों का गठन किया गया है। महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। समितियों के माध्यम से बाजार में उचित मूल्य की प्राप्ति और तकनीकी सहायता भी मिलेगी।

Sitamarhi News: उत्तमचंद वर्मा सीतामढ़ी। जिले में बकरी पालन को संगठित और लाभकारी स्वरोजगार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। सभी प्रखंडों में बकरी पालक सहकारी समितियों का गठन पूरा कर लिया गया है। इन समितियों का गठन जीविका मॉडल पर किया गया है। जिससे बकरी पालकों को संगठित मंच, बेहतर बाजार, तकनीकी सहयोग तथा आर्थिक सशक्तीकरण का लाभ मिल सके। समिति का कार्यकाल पांच वर्षों का निर्धारित किया गया है। इसके माध्यम से गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक मजबूत सहकारी नेटवर्क तैयार किया जाएगा。
महिलाओं को मिलेगा नेतृत्व का अवसर :
नई व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व पर विशेष जोर दिया गया है। समितियों के संचालन में महिला बकरी पालकों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाएगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को निर्णय लेने का अवसर मिलेगा और वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगी। अधिकारियों का मानना है कि महिला नेतृत्व से समितियों का संचालन अधिक प्रभावी और पारदर्शी होगा।
पशु सखी बनीं अध्यक्ष :
बकरी पालक सहकारी समिति के संचालन के लिए 13 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया गया है। समिति में पशु सखी को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्यकारिणी में विभिन्न पदों पर सदस्यों का चयन कर समिति के सुचारु संचालन, पशुपालकों के हितों की रक्षा तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी तय की गई है।
प्रखंड से राज्य स्तर तक बनेगी शृंखला :
गठित समितियों को प्रखंड, जिला और राज्य स्तर की सहकारी संस्थाओं से जोड़ा जाएगा। इससे बकरी पालकों की समस्याओं का समाधान आसान होगा तथा योजनाओं का लाभ सीधे सदस्यों तक पहुंचेगा। सहकारी ढांचे के माध्यम से प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, टीकाकरण, नस्ल सुधार और अन्य विकासात्मक गतिविधियों का संचालन भी बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।
बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर रहेगा जोर :
समितियों के गठन का मुख्य उद्देश्य बकरी पालकों को उनका उचित मूल्य दिलाना है। सहकारी नेटवर्क के माध्यम से बकरियों की सामूहिक खरीद-बिक्री, बाजार से सीधा संपर्क और बिचौलियों की भूमिका कम करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे पशुपालकों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही मूल्य संवर्धन और विपणन की नई संभावनाएं भी विकसित की जाएंगी।
प्रशिक्षण व तकनीकी सहायता मिलेगी :
समितियों के सदस्यों को आधुनिक बकरी पालन, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित आहार, टीकाकरण, बीमा और वैज्ञानिक पालन-पोषण की जानकारी दी जाएगी। समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें नवीन तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। जिससे बकरी पालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सके। इससे पशुओं की उत्पादकता बढ़ेगी और बीमारी से होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।
अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल :
विशेषज्ञों का मानना है कि बकरी पालन ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। सहकारी समितियों के गठन से छोटे और सीमांत पशुपालकों को एक साझा मंच मिलेगा। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह पहल स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह मॉडल जिले में पशुपालन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।
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