Dr Purnendu gave Sitamarhi momentum in the field of literature - डॉ. पूर्णेन्दु ने साहित्य के क्षेत्र में सीतामढ़ी को दी थी गति DA Image
11 दिसंबर, 2019|2:54|IST

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डॉ. पूर्णेन्दु ने साहित्य के क्षेत्र में सीतामढ़ी को दी थी गति

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हिन्दी दिवस पर हिन्दी को जिले में गति देने वाले वाले साहित्यकारों के नाम यू ही जुबां पर आ जाता है। आज हिन्दी दिवस है। ऐसे में महान साहित्यकार सह गोयनका कॉलेज के पूर्व हिन्दी विभागध्यक्ष डॉ. मदन मोहन प्रसाद वर्मा पूर्णेन्दु के संघर्षों को नहीं भुलाया जा सकता है। हिन्दी में डी.लीट की उपाधि प्राप्त कर चुके डॉ. पूर्णेन्दु हिन्दी के विकास के लिए हमेशा संर्घषशील रहे। इसलिए लोग उन्हें ‘संर्घष घटाओ इंदू डॉ. पूर्णेन्दु से भी जानते थे। जिले के हास्य-व्यंग्यकार गीतकार गीतेश बताते हैं कि सन् 1982-84 में उनके शहर स्थित आवास पर रहकर हिन्दी से ऑनर्स कर रहे थे। इस दौरान उनका मार्गदर्शन भी मिलता रहा। डॉ. पूर्णेन्दु का निधन अक्टूबर 2010 में हो गया। वे युवाओं को साहित्य के प्रति काफी जागरूक करते रहे। वे जिले में हिन्दी भाषा के विकास के लिए जीवनभर संघर्ष करते रहे। उनके द्वारा रचित पुस्तक ‘सृजन के हस्ताक्षर काफी चर्चित रही। पटना और दरभंगा आकशवानी से शतदल और पराग कार्यक्रम के तहत उनकी कविताएं प्रसारित होती रही। गीतेश बताते हैं कि उनकी एक पंक्ति सभी के दिलों को आज भी छू जाती है ‘हर अगला कदम पिछले कदम से खौफ खाता है, हर पिछला कदम अगले कदम से बढ़ जाता है। उनके पास कोई भी चुंबक की तरह उनके सानिध्य में चला आता था।

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