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15 अगस्त, 2020|3:40|IST

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फैक्ट्री बंद होने के बाद परिवार चलाना मुश्किल

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जिले के मजदूर प्रत्येक साल एक मई को समारोह पूर्वक मजदूर दिवस मनाते थे। लेकिन, इस साल जब कोरोना को लेकर जारी लॉकडाउन के कारण मजदूर दिसव पर कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।

प्लाइन फैक्ट्री बंद होने से घर बैठे डुमरा के मजदूर गोविंद कुमार बताते है कि लॉकडाउन के कारण एक माह से घर में बैठे है। परिवार चलाने पर आफत आ गई है। ऐसे में मजदूर दिवस मनाने से अधिक चिंता फैक्ट्री खुलने की हैं। यदि फैक्ट्री खुलेगी तो रोजी-रोटी की समस्या दूर होगी। शहर के एक बर्फ फैक्ट्री में काम करने सोहन कुमार ने बताया कि मजदूर दिवस पर जिने फैक्ट्री में छुट्टिया होती थी। वहंा महीनों से काम बंद है। मजदूर दिवस पर गिफ्ट मिलता था। अब बस छुट्टी ही छुट्टी है। जीवन मानो अंधकारमय हो गया है। इस प्रकार जिले के आधा दर्जन प्लाई फैक्ट्री, आरा मिल, बिस्कीट फैक्ट्री, होटल व रेस्टूरेंट में काम करने वालों मजदूरों ने बताया कि बेरोजगारी की समस्या से हर कोई परेशान है। मजदूरों को लॉकडाउन समाप्त होने का इंतजार है। ताकि काम-काम शुरू हो सके। यदि यहीं स्थिति रही तो भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। मजदूरों को छुट्टियां नहीं काम चाहिए। जिससे परिवार के भरण-पोषण के लिए रुपये कमाई कर सके।

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  • Web Title:Difficult to run family after factory closure