
सुप्पी के 147 वार्डों में तकनीकी खराबी के कारण लोगों को नही मिल रहा पेयजल का लाभ
संक्षेप: बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चलायी जा रही नल-जल योजना अधिकारियों की उदासीनता के कारण विफल हो गई है। 147 वार्डों में लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है, क्योंकि घटिया पाइप के कारण पानी घरों तक नहीं पहुँच रहा है। सांसद प्रतिनिधि ने डीएम से योजना को पुनः चालू कराने की मांग की है।
सुप्पी। बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने उद्देश्य से चलायी जा रही नल-जल योजना लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के उदासीनता के कारण अनुपयोगी साबित हो गयी है। इस कारण प्रखंड क्षेत्र के 11 पंचायतों के 147 वार्डों में लगाए गये नल-जल योजना का समुचित लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। बिहार सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2012-13 में तत्कालीन वार्ड क्रियान्वयन समिति के बैंक खातों में 14-14 लाख रुपए नल-जल योजना संचालित करने के उद्देश्य से दिए गये थे। इससे तत्कालीन वार्ड अध्यक्षों द्वारा नल-जल योजना के नाम पर पानी टंकी तो जरूर बना दिए गये, परन्तु लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए घटिया पाइप नली लगा दिया गए।

इस कारण लोगों के घरों तक लगाए गए घटिया पाइप नली टूट-फूट गये है। इससे सभी लोगों के घरों तक नल-जल योजना के माध्यम से पानी नहीं पहुंच रहा है। दूसरी ओर प्रखंड क्षेत्र के कई वार्डों में तकनीकी खराबी से भी नल-जल योजना ठप्प हो गये है। जानकारी के अनुसार प्रखंड क्षेत्र के बड़हरवा पंचायत में चार, मनियारी में तीन, रमनगरा में दो, ससौला में तीन, अख्ता उत्तरी में चार, अख्ता पूर्वी में पांच, हरपुर पीपरा में चार, कोठिया राय में तीन, मोहनी मंडल में पांच, नरहा पंचायत में दो समेत कुल 35 वार्डों में लगे नल-जल योजना ठप्प पड़े हुए हैं। इसे देखते हुए सांसद प्रतिनिधि रवीन्द्र कुमार सिंह ने डीएम से सुप्पी प्रखंड क्षेत्र में बन्द पड़े नल-जल योजना को चालू कराने की मांग की गयी है। ताकि प्रखंड क्षेत्र के सभी 147 वार्डों के लोगों को नल-जल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।

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