
महिलाओं व बुजुर्गो के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भोजन व व्यायाम जरूरी
पुपरी में कृषि विज्ञान केन्द्र सीतामढ़ी में बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वैज्ञानिकों ने खान पान और व्यायाम के महत्व पर जोर दिया। डॉ वीणा शाही ने बताया कि 60 वर्ष की आयु के बाद दिनचर्या में बदलाव जरूरी है। हरी सब्जियों और तेल से मालिश करने के फायदे बताए गए।
पुपरी। कृषि विज्ञान केन्द्र सीतामढ़ी में डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर के प्रयास से बुजुर्ग पुरुष एवं महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने ठंड के इस मौसम वृद्धजनों को स्वास्थ्य रहने के लिए खान पान एवं रहन सहन के प्रति जागरुक किया। इसकी पूरी विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर के प्राचार्य डॉ वीणा शाही ने कहा कि जब पुरुष या महिलाओं की उम्र 60 वर्ष के आसपास आ जाती है तो उन्हें दिनचर्या बदलने चाहिए। इस समय मुख्य रूप से संयमित खान पान,व्यायाम की जरूरत होती है।
इस उम्र में चिंता से बचने के लिए घर के छोटे बच्चों के साथ मनोरंजन, परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर वार्तालाप करें जिससे मानसिक चिंतन कम होगी। वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ राम ईश्वर प्रसाद ने बताया कि इस उम्र के महिला पुरुष हरी सब्जी, पपीता, निम्बू, अमरुद, जामुन का नियमित प्रयोग करें। इससे विभिन्न रोगों को आने से रोका जा सकता है। नोडल पदाधिकारी सह गृह वैज्ञानिक डॉ सलोनी चौहान ने कहा 60 वर्ष के आसपास चमड़ी ढीली होने लगती है। इसके लिए सरसों तेल का मालिश करने एवं सर्दी के समय गुनगुने पानी से स्नान करने से चमड़ी में ढीलापन कम होता है। केला,एलोवेरा,नारियल तेल का पेस्ट बनाकर उपयोग करने से भी शरीर की झुर्रियां कम की जा सकती है। झुर्रियां कम होने से मानसिक तनाव कम होता है जिससे जिंदगी आसान हो जाती है।

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