शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ेंगे 7364 दिव्यांग बच्चे, तैयारी में जुटी शिक्षा विभाग
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शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ेंगे 7364 दिव्यांग बच्चे, तैयारी में जुटी शिक्षा विभाग सीतामढ़ी, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि।
जिले में समावेशी शिक्षा को और सशक्त बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग कमर कस ली है। सीमित संसाधनों और शिक्षकों की कमी के बावजूद जिले के 7364 दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान प्रभावी ढंग से चलाया जा रहा है।
समग्र शिक्षा अभियान
समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले के विभिन्न प्रखंडों में संसाधन कक्ष संचालित किए जा रहे हैं, जहां दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप विशेष शिक्षण सामग्री, सहायक उपकरण और प्रशिक्षित शिक्षकों का सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार जिले में विशेष शिक्षकों के कुल 51 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 22 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 29 पद रिक्त हैं। इसके बावजूद 11 प्रखंड साधन सेवी, 11 संसाधन शिक्षक व एक पीओई शिक्षक के सहयोग से समावेशी शिक्षा कार्यक्रम को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। बताया गया है कि वर्ष 2024-25 के लिए स्वीकृत 16 संसाधन कक्ष पूरी तरह कार्यरत हैं। सप्ताह में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को विद्यालयों में संसाधन कक्ष संचालित होते हैं, जबकि अन्य दिनों में शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों को गृह आधारित शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।
संसाधन कक्षों का संचालन
जिले में बैरगनिया, बाजपट्टी, परसौनी, बेलसंड, चोरौत, परिहार, मेजरगंज, पुपरी, नानपुर, सोनबरसा, बोखड़ा, रीगा, रुन्नीसैदपुर, बथनाहा, सुरसंड और डुमरा प्रखंडों में संसाधन कक्ष संचालित हैं।
यूडीआईडी कार्ड बनाने की प्रक्रिया
वहीं, दिव्यांग बच्चों को सरकारी सुविधाओं से जोड़ने के लिए यूडीआईडी कार्ड बनाने का कार्य भी जारी है। अब तक 3277 छात्र-छात्राओं को यूडीआईडी कार्ड उपलब्ध कराया जा चुका है, जबकि 1239 कार्ड की प्रक्रिया चल रही है। बीईपी के समावेशी शिक्षा समन्वयक आलोक रंजन ने बताया कि समावेशी शिक्षा के माध्यम से हर दिव्यांग बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। संसाधन कक्षों और गृह आधारित शिक्षा से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है।
शिक्षा का उद्देश्य
‘ ‘ विभाग का उद्देश्य है कि कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ये बच्चे भी समाज में अपनी अलग पहचान बना सकें।
प्रियदर्शी सौरभ, डीपीओ एसएसए
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