DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   बिहार  ›  सीतामढ़ी  ›  55 सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं जिले में अब भी
सीतामढ़ी

55 सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं जिले में अब भी

हिन्दुस्तान टीम,सीतामढ़ीPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 03:50 PM
55 सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं जिले में अब भी

शिवहर | हिन्दुस्तान प्रतिनिधि

जिले में बीते पांच वर्षो में करीब 22 करोड़ की राशि उपलब्ध कराए जाने के बाद भी अभी तक 55 सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं। जिले में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वर्तमान में 77 सरकारी राजकीय नलकूप स्थापित किए गए है। जिसमें से 22 ही चालू हालत में शेष 55 सरकारी नलकूल विभिन्न कारणों ने बन्द पड़े है। जिले में पहले लघु जल संसाधन विभाग द्वारा सरकारी नलकूपों को संचालन किया जा रहा था। लेकिन अब यह जिम्मा पंचायतों को सौप दिया गया है। लघु जल संसाधन विभाग द्वारा सूचना के अधिकार के तहत दिए गए सूचना में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से लेकर वित्तीय वर्ष 2020-21 तक नलकूप को लेकर 22 करोड़ से अधिक की राशि उपलब्ध कराए गए है। जिसमें वित्तीय वर्ष 2015-16 में 135.513 लाख तथा सबसे अधिक वित्तीय वर्ष 2020-21 में 2052.900 लाख की राशि उपलब्ध कराया गया है। मालूम हो कि जिले के 80 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं। साथ ही यहां के लोगों के जीविका का मुख्य साधन कृषि ही है। इसके बाद भी यहां प्रर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं है। सिंचाई की समुचित सुविधा नहीं होने से किसानों में रोष है। क्योंकि लोगों को खेतों की सिंचाई मुहैया कराने के लिए सरकारी तौर पर जो सुविधाएं प्रदान की गयी है। वह वर्षों से नकारा साबित हो रहा है। क्षेत्र में स्थापित राजकीय नलकूपों में से अधिकतर नलकूप किसी न किसी कारण से बंद पड़े हैं। लेकिन विभागीय तौर पर नलकूपों को सुचारू कराने की दिशा में सार्थक प्रयास नहीं किया जा रहा है। किसानों को उपजाऊ भूमि होने के बावजूद सिंचाई के अभाव में अच्छी पैदावार से वंचित होना पड़ रहा है। वहीं निजी पम्प सेट के सहारे सिंचाई करने में प्रतिवर्ष किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। पिपराही प्रखंड के मोहनपुर गांव में दोनों नलकूप के बन्द रहने से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उदासीनता के चलते दोनों नलकुप वर्षों से बन्द पड़ा हुआ है। क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस गांव में दो नलकुप को स्थापित किया गया। विभाग द्वारा दोनों नलकुप को संचालित करने के लिए बिजली ट्रांसफार्मर लगाया गया। लाखों रुपए खर्च कर नाला निर्माण भी कराया गया। किन्तु नलकुप के बंद रहने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

संबंधित खबरें