बहन से पेड़ से बांधकर बदसलूकी, छुड़ाने गए भाई की हत्या; कोर्ट से 5 को उम्रकैद, 35 साल बाद फैसला
केस डायरी में आए साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने 2009 में मामले में हत्या की धारा में संज्ञान लिया। इसके दो वर्षों के बाद 16 अप्रैल 2011 से कोर्ट में गवाही शुरू हुई। इस मामले में 11 गवाहों को पेश किया गया।

Bihar Crime News: बिहार के मुजफ्फरपुर में जघन्य हत्याकांड के पांच दोषियों को कोर्ट ने उम्र कैद की सजा दी है। अहियापुर थाना क्षेत्र के शिवराहां चतुर्भुज गांव में 35 वर्ष पहले भूमि पर कब्जे का विरोध करने गई बसंती देवी को पेड़ से बांधकर बदसलूकी की गईा था। उसे छुड़ाने पहुंचे उसके भाई कुंवर राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले के पांच दोषियों को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-पंचम आलोक कुमार पांडेय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसला 35 साल बाद आया है।
सजा पाने वालों में शिवराहां चतुर्भुज गांव के बैद्यनाथ राय, रामबलम राय, महंत राय, रामचंद्र पासवान व सहदेव राय शामिल हैं। सभी को 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी देना होगा। जुर्माने की राशि नहीं देने वाले को दो-दो वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। वहीं, इस मामले के एक आरोपित लखी राय को कोर्ट ने पहले ही बरी कर दिया था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुनील कुमार पांडेय ने 11 गवाहों को पेश किया। सजा सुनाए जाने के दौरान बड़ी संख्या गांव के लोग व दोनों पक्षों के नाते-रिश्तेदार कोर्ट परिसर में थे।
लाइसेंसी बंदूक से मारी गई थी गोली
शिवराहां चतुर्भुज गांव के मोहन राय के बयान पर अहियापुर थाना में नौ अगस्त 1991 को एफआईआर दर्ज की गई थी। उसने कहा था कि नौ अगस्त 1991 की सुबह करीब आठ बजे बैद्यनाथ राय व अन्य उसकी भूमि पर कब्जा करने की नीयत से ट्रैक्टर से जोताई कर रहे थे। उसकी मां बसंती देवी जब इसका विरोध करने गई तो सभी ने उसे पेड़ से बांध दिया। उसे मुक्त कराने पहुंचे उसके मामा कुंवर राय को बैद्यनाथ राय ने लाइसेंसी बंदूक से गोली मार दी। उसके अन्य समर्थकों ने लाठी डंडे से उनकी पिटाई की। गंभीर स्थिति में कुंवर राय को एसकेएमसीएच पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
11 वर्षों तक चली गवाही
अपर लोक अभियोजक सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि मामले की तीन वर्षों की जांच के बाद पुलिस ने बैद्यनाथ राय व अन्य आरोपितों के विरुद्ध छह जुलाई 1994 को गैरइरादतन हत्या की धारा में चार्जशीट दाखिल की। केस डायरी में आए साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने 2009 में मामले में हत्या की धारा में संज्ञान लिया। इसके दो वर्षों के बाद 16 अप्रैल 2011 से कोर्ट में गवाही शुरू हुई। इस मामले में 11 गवाहों को पेश किया गया। इसमें से चार पक्षरोधी हो गए। 11 वर्षों तक चली गवाही के बाद आठ दिसंबर 2022 से इस मामले में बहस चली थी। अपर लोक अभियोजक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छेड़छाड़ की गई थी।
35 वर्षों से डर में जी रहा था परिवार
मामले सूचक मोहन राय ने बताया कि सजा पाने वाले लोग काफी दबंग हैं। केस उठाने को लेकर उनके परिवार को तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा था। 35 वर्षों से उनका परिवार डर-डर कर जी रहा था। पांचों को सजा सुनाए जाने के बाद वे भावुक हो उठे और कहा कि 35 वर्ष पहले हुई उस घटना को याद करने पर अब भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कोर्ट से उनको न्याय मिला है।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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