भाजपा के शिवेश राम से 700 वोट आगे थे राजद के एडी सिंह, फिर कैसे हार गए राज्यसभा चुनाव; गिनती का पूरा खेल समझिए

Mar 17, 2026 08:52 am ISTRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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Shivesh Ram AD Singh Rajya Sabha Vote Count Process: बीजेपी के शिवेश राम पहली वरीयता के मतों की गिनती में आरजेडी प्रत्याशी एडी सिंह से 700 वोट पीछे थे, लेकिन दूसरी वरीयता के मतों की गिनती में 302 वोट से जीत गए।

भाजपा के शिवेश राम से 700 वोट आगे थे राजद के एडी सिंह, फिर कैसे हार गए राज्यसभा चुनाव; गिनती का पूरा खेल समझिए

Rajya Sabha Election Shivesh Ram AD Singh Vote Counting Process: बिहार से राज्यसभा की 5 सीटों के चुनाव में विपक्षी दलों की एकता के बावजूद कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 4 एमएलए के गच्चा देने से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश महामंत्री शिवेश राम राज्यसभा की 5वीं सीट का चुनाव जीत गए हैं। विधानसभा में 202 विधायकों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की 4 सीटों पर जीत पहले से तय थी। मसला 5वीं सीट का था, जिसके लिए बीजेपी ने शिवेश और राजद ने अमरेंद्रधारी सिंह उर्फ एडी सिंह को लड़ाया था। शिवेश राम की जीत भाजपा के चुनाव प्रबंधन की एक और मिसाल है। शिवेश को पहली वरीयता के मतों की गिनती में एडी सिंह से 700 वोट कम थे, लेकिन दूसरी वरीयता के मतों में शिवेश ने एडी सिंह को 302 वोटों के अंतर से हरा दिया। राज्यसभा चुनाव में वोट की गिनती का खेल समझ लेंगे तो कांग्रेस और राजद के 4 विधायकों के गायब रहने की असली कीमत भी समझ में आ जाएगी।

वोट की गिनती का तरीका समझने से पहले यह समझना जरूरी है कि राज्यसभा चुनाव में हार-जीत कैसे होता है। विधानसभा में विधायकों की संख्या और राज्यसभा चुनाव के लिए खाली हो रही सीटों की संख्या के गुणा-भाग से यह तय होता है कि कितने वोट लाने पर कैंडिडेट जीत सकता है। चुनावी भाषा में इस नंबर को कोटा कहते हैं। बिहार में 5 सीट के लिए चुनाव हो रहा था। विधायक 243 हैं। तो राज्यसभा चुनाव के नियमों के मुताबिक 243 को 100 से गुणा करके खाली हो रही सीट संख्या यानी 5 में 1 जोड़कर 6 से भाग दिया जाता है और फिर उसमें 1 जोड़ दिया जाता है। इसकी गिनती इस तरह होती है कि दशमलव से भी हार-जीत का फैसला हो तो उसकी गणना स्पष्ट रहे।

बिहार विधानसभा की 243 सीटों के हिसाब से 24300 को 5 सीट में 1 जोड़कर यानी 6 से भाग देने पर 4050 आता है। इसमें 1 जोड़ने पर 4051 हो जाता है। जीत का कोटा यही था। 100 से भाग देने पर 40.51 आता है, जिसे पूर्ण अंक में 41 गिना जाता है। इसलिए यह कहा जा रहा था कि एक सीट जीतने के लिए 41 वोट चाहिए। असल में कैंडिडेट को 4051 वोट चाहिए था। लेकिन कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक के वोट नहीं देने से कुल वोट 239 पर आ गया।

कांग्रेस और राजद के विधायकों के गायब होने से जीत का कोटा 41 से 40 हो गया

कोटा की गणना बदल गई। 239000 को 6 से भाग देने पर 3983 आया। अब इसमें 1 जोड़ने पर कोटा 3984 हो गया। मतलब एक कैंडिडेट को असल में 39.84 वोट चाहिए था। पूर्ण अंक में 40 विधायक का वोट। अगर राजद और कांग्रेस के 4 विधायक वोट देते तो कोटा 4051 होता और एडी सिंह को पहली वरीयता में ही 4100 वोट आता और वो जीत जाते।

हमने पहले भी बताया था कि जब बड़े नेता राज्यसभा का चुनाव लड़ते हैं तो राजनीतिक दल कोटा से कुछ ज्यादा वोट डलवाते हैं ताकि कोई वोट कैंसिल हो जाए तो भी जीतने पर संकट ना पैदा हो। अब शिवेश राम की जीत का हिसाब समझिए। एनडीए के 202 विधायकों ने मतदान किया। इनके बीच कैंडिडेट वार वोट का बंटवारा इस तरह किया गया था कि नीतीश कुमार और नितिन नवीन को 44-44 विधायक पहली वरीयता का वोट देंगे। उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर को 42-42 एमएलए फर्स्ट प्रिफरेंस वोट करेंगे। शिवेश राम को 30 विधायक पहली वरीयता वोट देंगे। सूत्रों के मुताबिक भाजपा और लोजपा-आर के 30 विधायकों को शिवेश को पहला वोट देने की जवाबदेही दी गई थी।

30 विधायकों की पहली वरीयता वोट से शिवेश को 3000 वोट मिले थे। एनडीए ने नीतीश, नितिन, कुशवाहा और रामनाथ को पहली वरीयता का वोट देने वाले 172 विधायकों को दूसरी वरीयता का मत शिवेश राम को देने कहा था। एनडीए के विधायकों ने गठबंधन और दल के आदेश का पूरी तरह पालन किया, जिसने पहली वरीयता के मतों की गिनती में 700 वोट से पीछे रह गए शिवेश राम को दूसरी वरीयता की गिनती में 302 वोट से जिता दिया। अब इसकी गिनती चरणवार तरीके से समझ लेते हैं।

पहले राउंड की गिनती में एडी सिंह को 3700 और शिवेश राम को 3000 वोट

पहले राउंड यानी पहली वरीयता के मतों की गिनती में नीतीश कुमार और नितिन नवीन को 4400-4400 वोट मिले। कोटा 3984 था तो नीतीश और नितिन पहली वरीयता वोट से ही जीत गए। उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर को 4200-4200 वोट मिले। ये भी कोटा से अधिक वोट ला चुके थे, तो पहले राउंड में ही जीत गए। 5वीं सीट से दिल्ली जाने के लिए एडी सिंह के पास 37 विधायकों का समर्थन यानी 3700 वोट थे और शिवेश राम के पास 30 विधायकों की पहली वरीयता का समर्थन यानी 3000 वोट था। 700 वोट से शिवेश राम पीछे रह गए थे। लेकिन पहले राउंड में पांचवें नंबर पर रहे एडी सिंह भी 3984 का कोटा हासिल नहीं कर पाए, इसलिए दूसरे राउंड यानी दूसरी वरीयता के मतों की गिनती शुरू हुई।

दूसरी वरीयता के वोट की गिनती का तरीका और भी जटिल है, लेकिन है मजेदार

पहले राउंड में सबसे ज्यादा वोट लाने वाले कैंडिडेट को मिले वोट से कोटा का वोट घटाकर एक तय तरीके से दूसरी वरीयता के एक वोट की कीमत यानी वैल्यू तय होती है। दूसरी वरीयता की गिनती में वोट में कोटा घटाकर आए नंबर को पहले कैंडिडेट को वोट देने वाले विधायकों की संख्या से भाग दिया जाता है। इससे पहले कैंडिडेट के बैलट पर दूसरी वरीयता के वोट का मूल्य तय होता है।

इसके बाद पहले कैंडिडेट के बैलट पर किसी और कैंडिडेट को दूसरी वरीयता का वोट देने वाले की संख्या से गुणा करके उसकी पहली वरीयता के मतों में जोड़ दिया जाता है। वरीयता मतों की गिनती की यह प्रक्रिया दूसरी, तीसरी या आगे कैंडिडेट की कुल संख्या तक चल सकती है। लेकिन, जैसे ही किसी को कोटा मिल जाएगा, वो विजेता घोषित हो जाएगा। राज्यसभा की जितनी सीट खाली है, वो जैसे ही भर जाए, नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।

शिवेश राम ने 700 की ट्रेलिंग को 302 की लीड और जीत में कैसे बदला?

एनडीए ने जीरो टॉलरेंस के साथ 172 विधायकों से शिवेश राम को दूसरी वरीयता का मत दिलवाया था। सिवाय उन 30 के जिन्हें पहली वरीयता का मत शिवेश को देने कहा गया था। पहले राउंड की गिनती में सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो कैंडिडेट थे। नीतीश कुमार और नितिन नवीन दोनों को ही 4400 वोट मिले थे। नीतीश और नितिन में पहले किसके बैलट की दूसरी वरीयता गिनी जाए, चुनाव अधिकारियों ने लॉटरी से यह तय किया। नाम निकला नीतीश कुमार का। उनके पास 4400 वोट थे।

नीतीश के 4400 वोट से कोटा 3984 घटा दिया गया। बचा 416 वोट। 416 वोट को नीतीश को वोट देने वाले एमएलए की संख्या 44 से भाग दिया गया। नंबर आया 9.45। दशमलव बाद को हटाकर 9 गिन लिया गया। यह 9 दूसरी वरीयता के एक वोट का मूल्य था। नीतीश कुमार के सारे 44 वोटरों ने शिवेश राम को दूसरा वोट दिया था तो 9 को 44 से गुणा करके 396 निकला। यह नंबर शिवेश राम के 3000 में जोड़ दिया गया। शिवेश राम का वोट हो गया 3396 और एडी सिंह 3700 पर टिके रहे।

इसी तरह नितिन नवीन को पहली वरीयता के मत देने वाले 44 विधायकों की दूसरी वरीयता के वोट गिने गए। फिर नंबर आया 396। शिवेश राम के 3396 में 396 जोड़कर 3792 हो गया। अब शिवेश का वोट एडी सिंह से 92 वोट ऊपर आ गया, लेकिन कोटा से दूर था। इसलिए गिनती जारी रही। एक जैसे 4200 वोट के कारण फिर उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर के बीच लॉटरी हुई। कुशवाहा का नाम निकला तो उनके मतपत्र पर दूसरी वरीयता के वोट गिने गए। सभी 42 विधायकों ने शिवेश को दूसरी वरीयता का वोट दिया था।

उपेंद्र कुशवाहा को मिले पहली वरीयता के 4200 वोट से कोटा 3984 घटाने पर नंबर आया 216। फिर 216 में 42 से भाग दिया गया तो नंबर आया 5.14। दशमलव के बाद का हटाकर 5 को 42 से गुणा करने पर नंबर आया 210। शिवेश के 3792 में 210 जोड़ने पर वोट हो गया 4002। कोटा था 3984 का। वोट पहुंच गया 4002 पर। और इसके साथ ही शिवेश कुमार जीत गए। रामनाथ ठाकुर की पहली वरीयता के 42 मतपत्र गिनने की नौबत नहीं आई। लेकिन उसे गिन लेते तो 210 वोट के हिसाब से शिवेश के पास 4212 वोट होते।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
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