बिहार के सात लाख दूध उत्पादक ध्यान दें, पैसों के लिए अब नहीं करना होगा इंतजार; डीबीटी से सीधे खाते में जाएगी राशि
प्रथम चरण में इस माह के अंत तक आठों संघों के माध्यम से सभी जिलों से जुड़े पांच हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के 50 हजार दूध उत्पादकों के खाते में राशि जाने लगेगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से 22 हजार 416 दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े 7 लाख से अधिक दूध उत्पादकों के खाते में राशि जाएगी।

बिहार के दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ से जुड़े पशुपालकों को अब दूध बिक्री की राशि का अधिक दिनों तक इंतजार नहीं करना होगा। अब बिके दूध की कीमत दूध उत्पादकों के बैंक खाते में सीधे चली जाएगी। कॉम्फेड के आठ संघों से प्राथमिक स्तर पर दूध उत्पादक संघों को राशि जाने के बदले सीधे दूध उत्पादक के खाते में राशि जाएगी। इसके लिए प्राथमिक दुग्ध उत्पादक संघ दूध विक्रेताओं की सूची सभी आठ संघों को उपलब्ध करा देगा। सूची में संबंधित बिक्रेताओं के बैंक खाते का ब्योरा भी रहेगा। कॉम्फेड ने इस नई व्यवस्था की तैयारी पूरी कर ली है।
प्रथम चरण में इस माह के अंत तक आठों संघों के माध्यम से सभी जिलों से जुड़े पांच हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के 50 हजार दूध उत्पादकों के खाते में राशि जाने लगेगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से 22 हजार 416 दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े 7 लाख से अधिक दूध उत्पादकों के खाते में राशि जायेगी। डीटीए व्यवस्था से राज्य के दूध उत्पादकों को राशि मिलने के लिए इंतजार नहीं करना होगा। वर्तमान में कॉम्फेड से आठ दुग्ध संघ जुड़े हैं।
इसमें वैशाली पाटलिपुत्र दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ पटना, राजेंद्र प्रसाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ बरौनी, तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ मुजफ्फरपुर, मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ समस्तीपुर, शाहाबाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ आरा, विक्रमशिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ भागलपुर, मगध दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ गया, कोशी दुग्ध उत्पादक संघ सुपौल शामिल हैं। इससे जुड़े सात लाख दूध उत्पादकों द्वारा रोजाना 25 से 30 लाख टन दूध संग्रहित होता है। इसकी सुधा ब्रांड के नाम से बिक्री होती है।
कुल दूध में 70% की बिक्री पाउच में होती है। शेष 30% से दही, आइसक्रीम, पनीर, मिल्क पाउडर तैयार होता है। कॉम्फेड के एमडी कपिल अशोक ने कहा कि राज्य के दूध उत्पादकों के बैंक खाते में सीधे राशि चली जायेगी। इसके लिए डीएटी (डायरेक्ट एकाउंट ट्रांसफर) व्यवस्था लागू की जा रही है। इस माह के अंत तक 5 हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े 50 हजार दूध उत्पादक जुड़ जाएंगे। इसके बाद सात लाख से अधिक दूध उत्पादकों के खाते में सीधे राशि जायेगी। इससे पारदर्शिता अधिक होगी।


