बिहार में पुल अब नहीं धंसेंगे? सेटेलाइट रखेगा नजर, इजराइल के एक्सपर्ट की मदद से ऐक्शन प्लान बन रहा

Sudhir Kumar पटना, हिन्दुस्तान ब्यूरो
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विक्रमशिला सेतु का स्पैन नदी में गिरने और राज्य के कई पुलों में आई दरार की घटना सामने आने के बाद विभाग की ओर से विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इजराइल के विशेषज्ञों के साथ एक दौर की मीटिंग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेटेलाइट से मॉनिटरिंग के लिए हो चुकी है।

बिहार में पुल अब नहीं धंसेंगे? सेटेलाइट रखेगा नजर, इजराइल के एक्सपर्ट की मदद से ऐक्शन प्लान बन रहा

बिहार के पुलों की सेहत अब सेटेलाइट से भी जांची जाएगी। पुलों की इस आधुनिक जांच को लेकर पथ निर्माण विभाग ने इजराइल के विशेषज्ञों से भी संपर्क किया है। सेटेलाइट के माध्यम से जांच कैसे की जाती है और यह कितना कारगार होता है, इसको लेकर विभाग के स्तर पर अध्ययन शुरू कर दिया गया है। जल्द ही इसको लेकर कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी।

भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु का स्पैन नदी में गिरने और राज्य के कई पुलों में आई दरार की घटना सामने आने के बाद विभाग की ओर से विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इसी क्रम में इजराइल के विशेषज्ञों के साथ एक दौर की मीटिंग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यहां के पुल निर्माण से जुड़े अभियंताओं की हो चुकी है। मीटिंग के माध्यम से एक-एक चीज की जानकारी ली गई है कि सेटेलाइट पुल की जांच में कितना कारगार होगा।

इधर, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने फैसला लिया है कि साल में दो बार हर सभी पुलों का निरीक्षण किया जाएगा। इसी क्रम में राज्यभर के करीब चार हजार से अधिक पुलों का निरीक्षण भी किया गया है। हालांकि, किसी भी पुल में कोई बड़ी समस्या सामने नजर नहीं आयी। इस संबंध में पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेंद्र बताते हैं कि जिस प्रकार पुलों के निर्माण में अभियंताओं की पूरी टीम कार्य करती है। इसी प्रकार पुलों के नियमित निरीक्षण और जांच को लेकर भी अभियंताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसी क्रम में विभाग के स्तर पर पुलों के नियमित निरीक्षण को लेकर मानक संचालन प्रणाली (एसओपी) विकसित की जा रही है।

सेटेलाइट से पुलों की निगरानी ऐसे होती है

विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनियाभर में पुलों की निगरानी करने का एक शक्तिशाली और आधुनिक तरीका सेटेलाइट है। इसके अंतर्गत रडार इमेजिंग का उपयोग कर शोधकर्ता मिलीमीटर स्तरीय हलचल का पता लगा सकते हैं, जो निरीक्षकों के ध्यान में आने से बहुत पहले ही संरचनात्मक समस्याओं का संकेत देती है। इसके माध्यम से कुछ मिलीमीटर तक के छोटे संरचनात्मक बदलावों और झुकावों का पता लगा लगाया जा सकता है, जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देता है।

मेन प्वाइंट्स

● विक्रमशिला सेतु का स्पैन धंसने और कई पुलों में दरार के बाद निर्णय

● पथ निर्माण विभाग अध्ययन के बाद इस पर कार्ययोजना बनायेगा

● 03 मई, 2026 : भागलपुर जिले में विक्रमशिला पुल का एक स्पैन गंगा नदी में गिरा

● 23 मई, 2026 : गोपालगंज -गंडक नदी में पुल के स्पैम ने दरार से आवागमन रुका

● फरवरी, 2026 : जमुई के खैरा-सोनो मार्ग पर नरियाना-मांगोबंदर पुल पर आवागमन रुका

(नोट: आईआईटी पटना ने रिपोर्ट में आधा दर्जन पुलों की तत्काल मरम्मत जरूरी बताया है)

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लेखक के बारे में

Sudhir Kumar

टीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।

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