अब कहीं नहीं सुनाई देती जोगीरा सा रा रा रा... गीत
Mar 01, 2026 04:39 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सासाराम
डेहरी के गांवों में फागुन का माहौल होता है, जब सरसों के फूल खिलते हैं और होली गीत गाए जाते हैं। लेकिन अब पारंपरिक फगुआ और ढोल-मंजीरे की धुन सुनाई नहीं देती। ग्रामीणों में उत्साह की कमी देखी जा रही है।

डेहरी, एक संवाददाता। सरसों के फूल का खिलना व पछुआ हवा की सरसराहट फागुन का स्पष्ट संकेत देती है। इस माह में रंग, अबीर के साथ गांवों में पारंपरिक फगुआ, होली गीत की धूम मचती थी। किंतु अब फाग का राग शायद ही कहीं सुनाई पड़ता है। ढोल की थाप व मंजीरे की खनक सुन ग्रामीण मस्त हो जाते थे।
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