आहार व संस्कार के बिना मनुष्य का जीवन बन जाता दुखों का दल दल: स्वामी हरिनारायण
परसथुआ, एक संवाददाता। दौड़ता है वो धनी हो सकता है। महान व विद्वान नहीं बन सकता है। इसलिए सत्कर्म करो सच्चा सुख प्राप्त हो जायेगा। मौके

परसथुआ, एक संवाददाता। मनुष्य का जीवन तीन प्रमुख कार्य व लक्ष्य के लिए मिला है। पहला सेवा दूसरा सूख व तीसरा मुक्ति इन्हीं की प्राप्ति करना जीवन का लक्ष्य होता है। इसकी प्राप्ति तभी संभव है जब मनुष्य प्रकृति के बनाए नियमों का पालन करते हुए बिना राग द्वेष के जीवन का सफल संचालन करे। उपरोक्त उक्त बातें स्वामी हरिनाराणानंद ने शुक्रवार की शाम राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित आरती के बाद भक्तों से कही। उन्होनें कहा कि बिना सत्कर्म के जीवन में सुख नहीं मिल सकता। उन्होनें बच्चों को अच्छे संस्कार व सात्विक आहार देना चाहिए। ताकि उनका मन मस्तिष्क बुराई से दूर रहे।
जो मनुष्य धन के पिछे दौड़ता है वो धनी हो सकता है। महान व विद्वान नहीं बन सकता है। इसलिए सत्कर्म करो सच्चा सुख प्राप्त हो जायेगा।
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