एक अमीन के भरोसे पूरा अंचल, जमीन मापी के लिए रैयतों को दो-दो माह का इंतजार
(पेज चार)मीन नोखा, एक संवाददाता। नोखा अंचल में भूमि मापी व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। 13 पंचायतों और एक नगर परिषद क्षेत्र

नोखा, एक संवाददाता। नोखा अंचल में भूमि मापी व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। 13 पंचायतों और एक नगर परिषद क्षेत्र की जिम्मेदारी महज एक अमीन के कंधों पर होने के कारण रैयतों को अपनी जमीन की मापी कराने के लिए दो-दो माह तक इंतजार करना पड़ रहा है। खेतों की खरीद-बिक्री, बंटवारा, दाखिल-खारिज और सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
समस्या का विवरण
जानकारी के अनुसार पूरे नोखा अंचल में भूमि मापी के लिए केवल एक अमीन, संजीव कुमार, पदस्थापित हैं। खेती-किसानी और भूमि संबंधी अधिकांश कार्य मापी पर निर्भर होते हैं, लेकिन समय पर मापी नहीं होने से रैयतों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि आवेदन देने के बाद भी उन्हें कई बार अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है, फिर भी महीनों तक उनकी बारी नहीं आती।
आरोप और मांगें
इस बीच कई रैयतों ने आरोप लगाया है कि बिना अतिरिक्त राशि दिए उनकी जमीन की मापी में रुचि नहीं दिखाई जाती और उन्हें अनावश्यक रूप से टालमटोल का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों का आरोप है कि प्रभाव और पैसे के आधार पर मापी की तिथि में भी बदलाव कर दिया जाता है। भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री सह खरारी निवासी किसान विकास कुमार सिंह ने कहा कि पूरे अंचल में अकेले अमीन होने का बहाना बनाकर रैयतों को परेशान किया जा रहा है। इससे लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की क्षति हो रही है। उन्होंने सरकार से तत्काल अतिरिक्त अमीन की नियुक्ति करने की मांग की, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
अंचलाधिकारी मधुसूदन चौरसिया ने समस्या को स्वीकार करते हुए बताया कि पूरे अंचल में केवल एक अमीन के सहारे भूमि मापी का कार्य संचालित होने से कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल कटने के बाद भूमि मापी के आवेदनों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। वर्तमान में अंचल कार्यालय में 110 भूमि मापी आवेदन लंबित हैं। उन्होंने बताया कि अमीनों की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है। विभाग की ओर से जल्द अतिरिक्त अमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। नई नियुक्ति होने के बाद लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन किया जा सकेगा और लोगों को राहत मिलेगी।
भविष्य की उम्मीदें
भूमि मापी जैसी बुनियादी प्रशासनिक सेवा के लिए महीनों तक इंतजार करने को मजबूर रैयत अब यह सवाल उठा रहे हैं कि 13 पंचायतों और एक नगर परिषद के हजारों लोगों के लिए एक अमीन के भरोसे व्यवस्था आखिर कब तक चलती रहेगी। प्रशासन के आश्वासनों के बीच लोगों की निगाहें अब अतिरिक्त अमीन की तैनाती और समस्या के स्थायी समाधान पर टिकी है।


