अगजा दे, माई कगजा दे, ना होखे त दुगो गोइठा दे की आवाज गुम

Feb 28, 2026 10:04 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सासाराम
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(पेज चार लीड का जोड़) तरह नहीं देखी जा रही है। हर गांव में होलिका दहन के लिए अलग स्थान होता है। शिव प्रसाद गुप्ता कहते हैं कि हमेशा की

अगजा दे, माई कगजा दे, ना होखे त दुगो गोइठा दे की आवाज गुम

डेहरी, एक संवाददाता। होली की अपनी अलग ही पहचान है। शुद्ध सांस्कृतिक रूप से मनाए जाने वाले होली में हंसी ठिठोली के बीच गाए जाने वाले फगुआ में श्रृंगार रस के साथ वीर रस की प्रधानता रही है। सामाजिक एकता और सौहार्दपूर्ण वातावरण में होली पर्व को मनाने की तैयारी सभी जगह पूरी कर ली गई है।

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