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रेहल गांव में मलेरिया से साठ लोग बिमार

कैमूर पहाड़ी पर घने जंगल में बसे इस गांव के करीब हर-घर क लोग हैं बिमार

पीएचसी में मलेरिया व टायफाइड की दवा उपलब्ध वावजूद नही भेजा गया रेहल

नौहट्टा। एक संवाददाता

कैमूर पहाड़ी पर घने जंगल में बसे रेहल गांव के करीब हर-घर में लोग मलेरिया या टायफाइड से पीड़ित हैं। पीड़ित लोगों में बच्चे, युवा व बूढ़े भी शामिल हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस बात से बेखबर बनी हुई है। मुखिया श्याम नारायण उरांव ने चिकित्सा प्रभारी को सूचना दी, तो उनको एएनएम को सूचना देने की सलाह दी। एएनएम को सूचना देने पर संसाधन उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।

सूत्रों की मानें तो अस्पताल में मलेरिया व टायफाइड की दवा उपलब्ध है, लेकिन पहाड़ पर कोई जाना नहीं चाहता है। ग्रामीण बताते हैं कि रेहल में नाली गली का निर्माण तो कराया गया, लेकिन उसका रखरखाव ठीक ढंग से नहीं हो सका। सड़क पर मवेशियों को बांधने तथा घर की गंदगी को सड़क पर फेंकने के कारण गांव में चारों ओर गंदगी नजर आती है। इससे मच्छरों की संख्या बढ़ गई। ग्रामीणों ने बताया कि मलेरिया से छोटे लाल, नेहा कुमारी, अरविंद राम, कृष्णा उरांव, रागिनी कुमारी, सरस्वती देवी, सीमा कुमारी, पूजा कुमारी, रामरूप उरांव, वैजयंती देवी, वीरेंद्र उरांव, सीताराम, कबूतरी देवी, रानी कुमारी, पूनम कुमारी, अमृता कुमारी, उपेंद्र राम, संगीता देवी, विजय यादव, संजय साह, रीता देवी, पनवा देवी, बिसुनधारी उरांव, नरेश यादव, बसंती देवी, मछरिया कुंअर, सूरज उरांव, राजेश्वर अहीर समेत साठ लोग शामिल हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन जनार्दन शर्मा ने कहा कि उनको इस बात की जानकारी नहीं मिली है।

फोटो नंबर-5

कैप्शन- कैमूर पहाड़ी पर स्थित रेहल गांव में मलेरिया से बिमार बच्चा।

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