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बिना प्रबंध समिति के काम कराना मुखिया-पंस को पड़ा महंगा

(हिन्दुस्तान का असर)

हिन्दुस्तान में छपी खबर के बाद डीसीसी ने लिया मामले का संज्ञान

मुखिया व पंचायत सचिव को शो-कॉज, राशि रिकवरी का निर्देश

सासाराम। हिन्दुस्तान संवाददाता

मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना पर कार्य कराना मुखिया व पंचायत सचिव को महंगा पड़ गया। बिना प्रबंध समिति के मुखिया व पंचायत सचिव द्वारा करीब 19 लाख रुपए का काम कराया गया था। मामला कोचस प्रखंड के चितांव पंचायत का है। जहां मुखिया व पंचायत सेवक द्वारा बिना प्रबंध समिति के सात निश्चय योजना पर काम कराया गया है। इस खबर को दैनिक हिन्दुस्तान ने रविवार को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। खबर पर प्रभारी डीडीसी सह अपर समाहर्ता ओमप्रकाश पाल ने संज्ञान लिया है। कोचस के प्रखंड विकास पदाधिकारी को सख्त हिदायत देते हुए मुखिया व पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

डीडीसी के निर्देश पर कोचस बीडीओ डा. मनोज कुमार ने मुखिया व पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण मांगते हुए राशि रिकवरी का निर्देश दिया है। मुखिया व पंचायत द्वारा जितनी राशि का कार्य कराया गया है, उस राशि को वापस करने का निर्देश दिया है। निर्देश के बाद भी राशि वापस नहीं की गई, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी जाएगी। डीडीसी ने कहा कि बिना प्रबंध समिति के सात निश्चय योजनाओं पर कार्य करना गलत है। सरकार का सख्त निर्देश है कि सात निश्चय की राशि को वार्ड क्रियान्वनय समिति के खाते में पैसा ट्रांसफर करना है। वार्ड प्रखंड समिति द्वारा ही कार्य कराना है। उन्होंने कहा कि योजना की मापी पुस्तिका कैसे बुक की गई, इसकी भी जांच करायी जाएगी। कनीय अभियंता द्वारा एमबी बुक किया गया होगा तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

विदित हो कि बिना प्रबंध समिति के ही मुखिया व पंचायत सचिव ने सात निश्चय योजनाओं पर काम कराया गया है। मुखिया व पंचायत सचिव द्वारा करीब 19 लाख का काम काम कराया गया है। पंचायत सचिव व मुखिया सीधा खाता से राशि की निकासी किए हैं। पंचायत की वार्ड सदस्य पुष्पा देवी ने जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी, तो मामले का खुलासा हुआ।

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