आरिफ मोहम्मद खां 428 दिन बिहार के राज्यपाल रहे, कयास- क्यों हटाए गए महामहिम?
आरिफ मोहम्मद खान साहब सत्ता और विपक्ष दोनों के साथ एक बेहतर तालमेल बनाकर चले। पद संभालने के बाद से ही सभी दलों के प्रमुखों के साथ मुलाकात से उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी थी।

Bihar News: आरिफ मोहम्मद खां ने 2 जनवरी 2025 को बिहार के राज्यपाल पद की शपथ थी। वे बिहार के 42 वें राज्यपाल थे। उन्होंने राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की जगह ली थी। वे एक वर्ष 2 माह 3 दिन यानी 428 दिन बिहार के राज्यपाल रहे। आरिफ मोहम्मद खां के कार्यकाल में विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और परीक्षा सत्र को नियमित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए। बिहार में महज 14 माह के उनके संक्षिप्त कार्यकाल की वजह से कोई बड़ी उल्लेखनीय उपलब्धि उनके खाते में दर्ज नहीं दिखती। अलबत्ता केरल के उनके विवादित कार्यकाल की तुलना में यहां किसी प्रकार का कोई विवाद भी नहीं हुआ।
सत्ता और विपक्ष दोनों के साथ एक बेहतर तालमेल वे बनाकर चले। पद संभालने के बाद से ही सभी दलों के प्रमुखों के साथ मुलाकात से उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी थी। राज्यपाल के तौर पर अक्सर कार्यक्रमों में वे केरल की संस्कृति और इतिहास पर खूब चर्चा करते थे। साथ ही बिहार के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध संस्कृति का भी खूब बखान अपने संबोधनों में करते थे। वे महाभारत और रामचरित्र मानस की चौपाइयों के साथ उदाहरण देते थे।
बिहार के राज्यपाल रहते उन्होंने केरल में मनाया जाने वाला पर्व का लोकभवन में जोरदार आयोजन किया था। इतने कम दिनों के कार्यकाल में उन्हें हटाए जाने को लेकर अलग अलग कयास लगाए जा रहे हैं। केरल में लंबा कार्यकाल बिताने के साथ ही बिहार के 14 माह को जोड़कर छह साल राज्यपाल रहना अब पर्याप्त माना जा रहा है। बिहार में चुनावी साल में आने पर विपक्ष ने इसे चुनावी राजनीति से जोड़कर भी बयानबाजी की थी। एक चर्चा यह भी है कि संस्कृत और उर्दू के जानकार आरिफ साहब का केंद्र भविष्य में कही और सम्मानजनक उपयोग करे।
10 वर्षों में 7 राज्यपाल बदले
पिछले 10 वर्षों में बिहार में 7 राज्यपाल बदले। हाल के वर्षों में बिहार में राज्यपाल का कार्यकाल औसतन डेढ़ से दो साल ही रहे हैं।आरिफ मोहम्मद खां के पहले राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर 17 फरवरी 2023 से 1 जनवरी 2025 तक रहे। इसके पहले फागू चौहान 29 जुलाई 2019 से 16 फरवरी 2023 तक रहे। लालजी टंडन 23 अगस्त 2018 से 28जुलाई 2019 तक बिहार के राज्यपाल रहे।
सत्यपाल मल्लिक 4 अक्तूबर 2017 से 22 अगस्त 2018 तक रहे। इसके पहले 22 जून 2017 से 3 अगस्त 2017 तक केशरी नाथ त्रिपाठी राज्यपाल रहे। इसके पहले 16 अगस्त 2015 से 21 जून 2017 तक रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल थे।
नंदकिशोर को नागालैंड का राज्यपाल बनाने पर खुशी
भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाए जाने की घोषणा होते ही उनके समर्थकों ने खुशी से जश्न मनाया। गुरुवार की रात जैसे ही इसकी सूचना मिली समर्थक उनके आवास पर बधाई देने पहुंचे। देर रात तक उनके घर पर समर्थकों की भीड़ जुटी थी। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रभाकर मिश्र,विधायक रत्नेश कुशवाहा, सह कोषाध्यक्ष नितिन अभिषेक समेत विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने नंदकिशोर यादव को बधाई दी है। मौके पर बड़ी संख्या में जदयू और भाजपा के कार्यकर्ता मौजूद थे। राज्य भर से लोगों ने उन्हें राज्यपाल बनाये जाने पर बधाई संदेश और नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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