
तारापुर में पहली बार ताज की आस में सम्राट चौधरी, RJD-जनसुराज ने मुकाबले को बनाया टफ
महागठबंधन ने सम्राट के मुकाबले के लिए असरगंज निवासी अरुण कुमार साव (राजद) को उतारा है। अरुण वैश्य जाति से आते हैं और 2021 के उपचुनाव में उन्होंने जदयू प्रत्याशी राजीव कुमार को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि वह 4000 से भी कम मतों के अंतर से पराजित हो गये थे
मुंगेर जिले के तारापुर विधानसभा सीट से पहली बार किस्मत आजमा रहे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रतिष्ठा दांव पर है। अपने राजनीतिक सफर में सम्राट चौधरी पहली बार अपने गृह जिले से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पूर्व वह खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके हैं। उप मुख्यमंत्री के चुनाव मैदान में उतरने से तारापुर सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

महागठबंधन ने सम्राट के मुकाबले के लिए असरगंज निवासी अरुण कुमार साव (राजद) को उतारा है। अरुण वैश्य जाति से आते हैं और 2021 के उपचुनाव में उन्होंने जदयू प्रत्याशी राजीव कुमार को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि वह 4000 से भी कम मतों के अंतर से पराजित हो गये थे। इस बार जन सुराज पार्टी ने पेशे से चिकित्सक डॉ संतोष कुमार सिंह को उतारा है। वह स्थानीय हैं। इस वजह से मुकाबला पूर्व के चुनावों के मुकाबले ज्यादा संघर्षपूर्ण होने के आसार हैं।
तारापुर क्षेत्र पर पिछले 15 वर्षों से लगातार जदयू का कब्जा रहा है। सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी ने 23 वर्षों इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वह अलग-अलग दलों से और निर्दलीय लड़कर भी जीते। सम्राट चौधरी की माता स्व. पार्वती देवी भी तीन वर्षों तक यहां की विधायक रहीं। इस बार चुनाव में माता-पिता की विरासत को फिर से हासिल करने की बड़ी चुनौती भी सम्राट चौधरी के कंधों पर होगी।
मुद्दों व समीकरणों के जरिए गोलबंदी
यहां के चुनाव परिणाम कुशवाहा, यादव, बिन्द, वैश्य समुदाय और अति पिछड़ा के वोट से प्रभावित होता रहा है। हालांकि कुशवाहा समाज ज्यादा संगठित हैं। एनडीए जहां विकास कार्यों की उपलब्धि को घर-घर पहुंचा रहा है, वहीं राजद ने तेजस्वी यादव के हर परिवार से एक को सरकारी नौकरी के नारे को मुद्दा बनाया है। जनसुराज की ओर से पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का वायदा किया जा रहा है। यहां से 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। दोनों गठबंधनों और जन सुराज पार्टी की ओर से चुनाव प्रचार तेज है। मतदान छह नवंबर को होने वाला है।
तीन दशक बाद ईवीएम पर दिखेगा कमल निशान
लगभग 30 वर्ष बाद इस बार तारापुर विस क्षेत्र के चुनाव में मतदान के दौरान ईवीएम पर भाजपा का चुनाव चिह्न कमल देखेगा। वर्ष 1995 में जब चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे, तारापुर विस के भाजपा उम्मीदवार कमल निशान के साथ मैदान में थे। लेकिन उसके बाद से यह सीट भाजपा के खाते से निकल गई। 1995 के बाद से एनडीए गठबंधन की सीट शेयरिंग में तारापुर सीट कभी समता पार्टी और बाद में जदयू के हिस्से में चली गई। इस वजह से इन दलों के ही चुनाव चिह्न ईवीएम में होते थे।
क्षेत्र के मुद्दे
1. नगर पंचायत क्षेत्र में नाला और सड़कों का निर्माण
2. हरपुर पश्चिमी बहियार के सैकड़ों एकड़ खेतों को जलजमाव की समस्या
3. डांढ़ के अतिक्रमण के कारण कई गांवों में सिंचाई की समस्या





