कभी नीतीश कुमार को गद्दी से हटाने के लिए बांधी थी पगड़ी, BJP में कैसे बढ़ता गया सम्राट चौधरी का कद

Nishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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Samrat Choudhary: विरोधियों पर वे आक्रामक तरीके से हमला करते हैं। एक समय उन्होंने नीतीश कुमार को गद्दी से हटाने के लिए प्रतीकात्मक तौर पर मुरेठा (पगड़ी) बांध लिया था। हालांकि जनवरी 2024 में एनडीए की सरकार बनने पर उन्होंने अयोध्या में मुंडन करा अपना मुरेठा उतार दिया था।

कभी नीतीश कुमार को गद्दी से हटाने के लिए बांधी थी पगड़ी, BJP में कैसे बढ़ता गया सम्राट चौधरी का कद

Samrat Choudhary: बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेताओं में से एक पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी के बेटे और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने वाले सम्राट चौधरी वैसे तो राबड़ी मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे, लेकिन भाजपा में आने के बाद इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कम अवधि में ही सम्राट चौधरी ने सरकार से लेकर संगठन तक में अहम जिम्मेदारी निभाई। सम्राट चौधरी ने बिहार भाजपा में नेतृत्व को लेकर उत्पन्न हुई रिक्तता को भरने में कामयाबी हासिल की। उन्होंने राजनीतिक बुलंदियों को पाया। इसी का परिणाम रहा कि वे शीर्ष पद पर विराजमान हो रहे हैं।

राजद से राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले सम्राट चौधरी ने जदयू और हम (से) से होते हुए वर्ष 2018 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी के दिवंगत नेता सुशील कुमार मोदी सम्राट चौधरी को भाजपा में लाए। तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय की टीम में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2020 में जब एनडीए की सरकार बनी तो पंचायती राज मंत्री बने। इसी क्रम में जब 2022 में एनडीए गठबंधन टूट गया तो सम्राट चौधरी को विप में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई। सदन में उन्होंने विरोधी दल के रूप में अमिट छाप छोड़ी। जनहित के मुद्दे पर सम्राट चौधरी ने सरकार को कई बार असहज किया। विपक्षी नेता के तौर पर सम्राट चौधरी के तेवर को देखते हुए उन्हें मार्च 2023 में सांसद संजय जायसवाल के स्थान पर बिहार भाजपा की कमान सौंपी गई।

संगठन को बनाया धारदार

बतौर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने संगठन को धारदार बनाया। खासकर लालू प्रसाद, राजद और सरकार पर वे काफी हमलावर रहे। एक तरह से सुशील मोदी के बाद जो पार्टी में नेतृत्व को लेकर रिक्तता दिख रही थी, सम्राट चौधरी ने उसे बखूबी पूरा किया। यही कारण रहा कि जब जनवरी 2024 में फिर से एनडीए की सरकार बनी तो पार्टी ने उन्हें सरकार में दो नंबर की कुर्सी यानी उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। बतौर वित्त एवं वाणिज्यकर मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने बजट भाषण में कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। लोकसभा चुनाव के समय सम्राट चौधरी ही बिहार भाजपा के प्रमुख थे। पार्टी 12 सीटों पर जीत हासिल की। एक व्यक्ति एक पद के तहत सम्राट चौधरी ने जुलाई 2024 में पार्टी की कमान छोड़ दी।

मुरेठा बांधने से हुए चर्चित, एनडीए सरकार बनने पर उतारा

बतौर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में ही भाजपा नवम्बर 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ी। सरकार की ओर से की गई तमाम जनकल्याणकारी घोषणाओं का श्रेय सम्राट चौधरी को ही जाता है। माना जाता है कि सरकार की ओर से जो भी निर्णय लिए गए, नीतीश कुमार की सहमति पर वह सम्राट चौधरी ही लेते रहे। नौकरशाह भी सम्राट चौधरी से भी दिशा-निर्देश लिया करते। ऐसा पहली बार हुआ जब भाजपा गठबंधन में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। एनडीए के 202 में से भाजपा ने 89 सीटों पर जीत हासिल की। सम्राट चौधरी की कार्यक्षमता को देखते हुए ही पार्टी ने दुबारा उन पर भरोसा किया और वे उपमुख्यमंत्री बनाए गए।

यही नहीं, एनडीए के इतिहास में पहली बार गृह विभाग मुख्यमंत्री से हटकर सम्राट चौधरी के जिम्मे आया। गृह मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने कई घोषणाएं कीं। खासकर अपराधियों को गया में पिंडदान करने जैसे उनके वाक्य कानून-व्यवस्था को लेकर उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता रहा। सम्राट चौधरी अपने बेबाकी स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। विरोधियों पर वे आक्रामक तरीके से हमला करते हैं। एक समय उन्होंने नीतीश कुमार को गद्दी से हटाने के लिए प्रतीकात्मक तौर पर मुरेठा (पगड़ी) बांध लिया था। हालांकि जनवरी 2024 में एनडीए की सरकार बनने पर उन्होंने अयोध्या में मुंडन करा अपना मुरेठा उतार दिया था।

● जन्म: 16 नवंबर 1968 (उम्र 58 वर्ष), लखनपुर, तारापुर, मुंगेर बिहार

● पिता: शकुनी चौधरी, पूर्व मंत्री

● माता: स्व. पार्वती देवी, पूर्व विधायक

● जीवनसाथी: कुमारी ममता, अधिवक्ता

● बच्चे: 02 (बेटी चारू प्रिया और बेटा प्रणय प्रियम चौधरी)

● पेशा:राजनीतिज्ञ/समाज सेवा

● उच्चतम योग्यता: पीएफसी कामराज विवि से डॉक्टरेट की मानद उपाधि

राजनीतिक सफर

● 1990 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया

● 19 मई 1999 को राबड़ी देवी की सरकार में राज्य मंत्री के रूप में सबसे युवा मंत्री बने

● 2000 और 2010 में परबत्ता (विधानसभा क्षेत्र) से राजद से चुनाव लड़े और विधायक बने

● 2014 में जेडीयू और फिर हम (से) में शामिल हुए

● 24 मई 2014 झ्र 06 जनवरी 2016 तक जदयू से विधान परिषद के सदस्य रहे

● 2018 में भाजपा में शामिल हो गए

● 29 जून 2020 से 14 नवंबर 2025 तक वे विधान परिषद में भाजपा से सदस्य रहे

● मार्च 2023 से जुलाई 2024 और विधान परिषद में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया

● 28 जनवरी 2024 को उपमुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण किया

● 2025 में तारापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से विधायक बने

● 20 नवंबर 2025 को उपमुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण किया।

● इन विभागों का कामकाज संभाला : नगर विकास एवं आवास विभाग, पंचायती राज, स्वास्थ्य, वित्त, वाणिज्यकर और गृह विभाग

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Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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