नीतीश के बाद CM कौन? मधेपुरा के बाद अररिया में भी सम्राट चौधरी के हाव-भाव पर नजर अटकी
CM Nitish Samrat News: बिहार में पर्दे के पीछे चल रही भाजपा के मुख्यमंत्री की खोज राज्यसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफे से पहले पूरी हो जाएगी। अप्रैल के पहले या दूसरे हफ्ते में भाजपा का सीएम बन जाएगा।

बाहर से कुछ होता दिख नहीं रहा, लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने किस नेता को सीएम की कुर्सी पर बिठाएगी, इसे लेकर पर्दे के पीछे से खेल चल रहा है। पांच दिन की समृद्धि यात्रा पर निकले नीतीश कुमार के साथ सरकार के नंबर 2 और भाजपा के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी सीमांचल में घूम रहे हैं। यात्रा की सभाओं में नीतीश और सम्राट की केमिस्ट्री मंचों पर दिख रही है। मधेपुरा में जब नीतीश हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन कर रहे थे, तो सम्राट हाथ जोड़े दिखे थे। ऐसा लग रहा था जैसे नीतीश किसी का परिचय करा रहे हों। अब अररिया से भी वैसी ही तस्वीर आई है। करबद्ध सम्राट और हाथ लहराते नीतीश। सम्राट के इस हाव-भाव को डिकोड करने में भाजपा के वो सारे नेता परेशान हैं, जिन्हें अप्रैल में अपनी किस्मत पलटने का अनुमान है।
समृद्धि यात्रा के दौरान नीतीश कुमार अपने दो दशक के शासन के दौरान बिहार की कानून व्यवस्था से लेकर परिवहन, बिजली और दूसरे क्षेत्रों में आए सुधार की याद दिला रहे हैं और कह रहे हैं कि वह आगे भी बिहार से जुड़े रहेंगे और नई सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे। अगले 5 साल का प्लान बता रहे हैं। उनके साथ घूम रहे सम्राट भी नीतीश की तारीफों के पुल बांध रहे हैं और लोगों को भरोसा दे रहे हैं कि आगे भी सरकार नीतीश के हिसाब से चलेगी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भाजपा के सीएम चयन में नीतीश की संभावित भूमिका को यह कहकर पहले ही कबूल चुके हैं कि नई सरकार उनके ही नेतृत्व में बनेगी। मतलब, नीतीश की पसंद और नापसंद भाजपा के सीएम चुनने में एक प्रभावी कारक साबित हो सकता है। चर्चा है कि नया सीएम नीतीश की तरह पिछड़ी जातियों (ओबीसी) या उनके कोर वोटर समूह अति पिछड़ी जातियों (ईबीसी) से हो सकता है।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और दिल्ली में चर्चा तक से भी बाहर रहे नेताओं को सीधे मुख्यमंत्री पद पर बिठाकर भाजपा ने जनता के साथ-साथ अपने नेता-कार्यकर्ता को भी रोमांचक राजनीति का स्वाद चखाया है। बिहार में दो दशक से नीतीश कुमार के पीछे-पीछे चली भाजपा को राज्य में पहली बार जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से आगे चलने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का नेतृत्व करने का मौका मिलेगा। बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री चुनने जा रही भाजपा सरप्राइज देगी या जिन बड़े और चर्चित नेताओं के नाम चर्चा में चल रहे हैं, उनमें ही किसी को एनडीए विधायक दल का नेता बनाएगी, ये इस समय पहेली बनी हुई है।
दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय राज्यमंत्री नित्यानंद राय, राज्य के मंत्री मंगल पांडेय और दिलीप जायसवाल, विधायक संजीव चौरसिया, नीतीश मिश्रा का नाम रेस में गिना और गिनाया जा रहा है। बिहार में भाजपा के पास 89 विधायक, 22 विधान पार्षद के अलावा 4 राज्यसभा और 12 लोकसभा सांसद हैं। पार्टी के पास संगठन में भी कई नेता हैं, जो इस समय सदन में नहीं हैं। ऐसे मौके पर चौका मारने का मौका इनमें से किसी को भी मिल सकता है।
राज्यसभा का चुनाव 16 मार्च को मतदान और नतीजों के साथ पूरा हो जाएगा। नीतीश 9 अप्रैल के बाद ही राज्यसभा सांसद की शपथ लेंगे, जिस दिन उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की सदस्यता का टर्म पूरा होगा। नए सीएम की खोज में अगले तीन-चार सप्ताह सबकी नजर दिल्ली में बैठे पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी चीफ नितिन नवीन पर टिकी होगी।
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