Water Crisis in City Demand for Cleaning Old Gandak River and Freeing Ponds नदियों से हटे गाद और तालाबों का हो जीर्णोद्धार, तभी दूर होगा जलसंकट, Samastipur Hindi News - Hindustan
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नदियों से हटे गाद और तालाबों का हो जीर्णोद्धार, तभी दूर होगा जलसंकट

शहर में जलस्तर गिरने की समस्या से लोग परेशान हैं। चापाकल सूख गए हैं और पानी की कमी है। लोगों ने बूढ़ी गंडक नदी से गाद हटाने और पोखरों को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग की है। अगर ये काम किए जाएं, तो...

Newswrap हिन्दुस्तान, समस्तीपुरThu, 4 Sep 2025 01:42 AM
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नदियों से हटे गाद और तालाबों का हो जीर्णोद्धार, तभी दूर होगा जलसंकट

बीते कुछ वर्षों में शहर में जलस्तर गिरने की समस्या से लोग परेशान हैं। स्थित यह है कि सामान्य चापाकल पूरी तरह से सूख गये हैं। वहीं सरकारी चापाकल से भी सही से पानी नहीं निकल रहा है। ऐसे में जल संचय के प्रति लोगों को ध्यान अब जाने लगा है। हिन्दुस्तान बोले अभियान के तहत लोगों ने गिरते जलस्तर के निदान को लेकर शहर स्थित पोखर को अतिक्रमण मुक्त कराने सहित शहर से होकर गुजरने वाली बूढ़ी गंडक नदी से गाद हटाने की मांग की। लोगों का मानना है कि शहर में करीब 38 पोखर है। वहीं शहर के बीचोबीच बूढ़ी गंडक नदी गुजरती है।

अगर पोखर व नदी में वर्षभर पानी रहेगा तो शहर का जलस्तर नहीं गिरेगा। शहर में लगभग सभी पोखर अतिक्रमित है। प्रशासन हर बार इसे मुक्त कराकर सौंदर्यीकरण की बात कहता है। लेकिन अब तक एक भी पोखर न तो अतिक्रमण मुक्त हुआ है और न ही उसका सौंदर्यीकरण ही किया जा सका है। बूढ़ी गंडक नदी में हर साल बढ़ रहा गाद (बालू का ढ़ेर) टापू का रूप लेता जा रहा है। यह नदी की गहराई को कम कर रहा है। जो जलस्तर की बढ़ोतरी पर तटबंधो पर दबाब बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। यह हालात मथुरापुर घाट, पूसा-सैदपुर पुल, जितवारपुर समेत अन्य दर्जनों स्थल पर है। जिसे निकालने की जरूरत है। चर्चा के दौरान आफताब अंसारी और शैलेश ठाकुर ने बताया कि तालाब मुक्त होने से वहां जल का संचय हो सकेगा। वहीं आसपास में जलस्तर बरकरार रहेगा। वहीं नदी से गाद निकल जाने से नदी की गहराई बढ़ जायेगी। जिससे जलस्तर का भंडारण अधिक हो सकेगा। जेबा बेगम ने कहा कि अगर नदी से गाद की सफाई हो जाये तो नदी में कभी पानी कम नहीं होगा। इससे शहरवासियों को जलसंकट की समस्या से निजात मिलेगी। इस नदी में वर्षभर पानी रहेगा तो शहर का जलस्तर नहीं गिरेगा। गाद की सफाई नहीं होने की वजह से पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है। पानी का बहाव बाधित होने की वजह से बरसात में जब नदी में पानी आता है तब नदी का पानी नाले के पाइप से शहरी इलाके में प्रवेश करने लग जाता है। इससे करीब आधा दर्जन मोहल्ले के लोग महीनों तक परेशान रहते हैं। नाला को बंद किये जाने पर शहर का पानी शहर के नालों में ही रह जाता है। जिस कारण नाला ओवर फ्लो होकर सड़क पर गंदा पानी बहने लग जाता है। वहीं मुकूल साह ने बताया कि शहर के बीचोबीच कई पोखर है। इसको अतिक्रमण मुक्त कराते हुए इसका सही से अगर सौदर्यीकरण हो जाए तो एक तरहफ जहां जल संचय होगा वहीं लोगों पोखर किनारे बैठकर आनंद ले सकते है। जहां शहर वासी सुकूल के दो पल बिताते है। वहीं ममता चौधरी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में बूढ़ी नदी अतिक्रमण की शिकार होती जा रही है। धर्मपुर, मगरदही घाट से जितवारपुर मोक्षधाम तक लोग नदी की पेटी में पक्का निर्माण कर रहे है। बूढ़ी गंडक नदी के किनारे सड़क के दोनों तरफ अवैध बहुमंजिला इमारत का निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। कुछ भवन व इमारत बनकर तैयार हो चुकी है वहीं दूसरी ओर नदी में कुछ भवनों व बहुमंजिली इमारतों का निर्माण जारी है। इन भवनों के निर्माण में किसी भी विभाग से किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई।

बोले जिम्मेदार-

क्षेत्र में जो भी तालाब हैं उसे अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा। वहीं शहर में स्थित तालाबों की सूची भी निगम की ओर से तैयार की गई है। उसे भी अतिक्रमणमुक्त कराकर सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इससे दो फायदे होंगे। एक तो पानी का संचय होगा, वहीं दूसरा पर्व त्योहार पर लोगों को परेशानी नहीं होगी। -दिलीप कुमार, एसडीओ सदर

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