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समस्तीपुर

नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से लोगों में है दहशत

हिन्दुस्तान टीम,समस्तीपुरPublished By: Newswrap
Fri, 18 Jun 2021 04:50 AM
नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से लोगों में है दहशत

बूढ़ी गंडक एवं बागमती के जलस्तर में लगातार बारिश से बढ़ोतरी शुरू हो गयी है। हालांकि अभी स्थिति चिंताजनक नहीं हैं, लेकिन जलस्तर में वृद्धि जारी रहने पर एक सप्ताह बाद खेत खलिहान से होकर लोगों के घरों में पानी घुस सकता है। इससे नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोग बाढ़ की आंशका से अभी ही सहम गये हैं। ऐसे लोगों ने लोग अपनी जरूरत के सामान को समेटना भी शुरू कर दिया है। संभावित बाढ़ को लेकर लोग चावल, चूड़ा, सलाई, जलावन आदि सामान का स्टॉक करने लगे हैं। इसके साथ ही जिनके पास पशु हैं वे उसके लिए ऊंची जगह की खोज में हैं। विदित हो कि कल्याणपुर प्रखंड में लगभग सभी साल लोगों को बाढ़ का प्रकोप झेलना ही पड़ता है। नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर लोगों के घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाता है जिससे सभी को विस्थापित होने को विवश होना पड़ता है। मलिकौली, महादेव स्थान, खरसंड एवं सुरही आदि जगहों पर तटबंध एवं स्लूइस गेट की स्थिति ठीक नहीं है जिससे बागमती में पानी बढ़ने पर लोगों को बाढ़ का तांडव झेलना पड़ सकता है। बूढ़ी गंडक तटबंध की माधोपुर, मोहनपुर, रमोली, रामपुरा, बालापुर, अकबरपुर सहित कई जगहों स्थिति खराब है।

हालांकि प्रभारी सीओ संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ पूर्व सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

मानसून आने के साथ क्षतिग्रस्त तटबंध डरा रहा लोगों को

बिथान | जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में शामिल बथान प्रखंड के में मानसून आने के साथ क्षतिग्रस्त तटबंध लोगों को बाढ़ की विभीषिका से डराने लगा है। प्रखंड के सलहा बुजुर्ग गांव में चिरोटना के समीप वाटरवेज बांध में बरसात से कटाव शुरू होने के बावजूद उसकी मरम्मत के लिए कोई विभागीय पदाधिकारी नहीं पहुंचे हैं। इससे ग्रामीणों को आशंका है कि बाढ़ आने पर तबाही मचनी तय है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल भी यहां कटाव हुआ था तब विभाग के अधिकारी पहुंचे थे और कुछ काम कराया था। लेकिन सही से काम नहीं होने के कारण लगातार बारिश से मिट्टी कट-कट कर गिर रहा है। समय रहते मरम्मत नहीं होने पर बाढ़ आने पर दर्जनों परिवार के लोग बेघर हो जाएंगे। विदित हो कि एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश से नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। सीओ विमल कुमार कर्ण ने बताया कि विभागीय की ओर से बांध का मरम्मत कराया जा रहा है। हायाघाट से शुरू हुआ काम जल्द ही बेलसंडी बांध तक पहुंचेगा। वैसे बाढ़ से निपटने की तैयारी पूरी की जा चुकी है। सामुदायिक किचन के अलावा आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था की गयी है। पशु चारा के लिए भी ऊंचे जगहों का चयन करने के साथ मेडिकल टीम भी तैयार की गयी है।

लगातार बारिश से चकमेहसी में बाढ़ का खतरा मंडराया

चकमेहसी। पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश से बागमती के जलस्तर में बढ़ोतरी से निचले हिस्सों में रहने वाले लोग बाढ़ की आशंका से सहम गए है। सभी सुरक्षित स्थानों को तलाश करने के साथ ही अपने सामान भी सहेजने लगे है। विदित हो कि कलौंजर, नामापुर, बेलसंडी व सोरमार पंचायत के दो दो वार्ड वाटरवेज बांध के अंदर बसे है। जहां हर वर्ष करीब तीन महीना लोग पानी से घिरे रहते है। वही भराव, रामजाननगर, सलहा, गंगौरा के कई टोले निचले हिस्सों में अवस्थित है। इन निचले हिस्सों के लोगों के समक्ष बाढ़ का खतरा उत्पन हो गया है। इधर रमजाननगर में हो रहे कटाव की खबर ' हिन्दुस्तान' में प्रकाशित होने के बाद अधिकारी हरकत में आए और रमजाननगर में कटाव निरोधी बंडाल का कार्य शुरू किया। हालांकि वाटरवेज बांध रामपारन से सितौहिया तक जगह जगह स्थित रेनकट को दुरूस्त करने की जल संसाधन विभाग ने जहमत नहीं उठाई है। जिससे नए इलाकों के लोग भी बांध की जर्जर स्थिति से बाढ़ की आशंका से चिंतित है। इधर बूढ़ी गंडक के सोमनाहा से मालीनगर तक तटबंध पर जगह जगह बने रेनकट को मिट्टी डाल कर दुरुस्त कर दिया गया है। जल संसाधन विभाग के जेई अरविंद कुमार ने बताया कि बूढ़ी गंडक के बांध पर बने रेन कट को दुरुस्त कर लिया गया है। बारिश के कारण बन रहे रेन कट को भी तेजी से दुरुस्त करने का काम चल रहा है। नामापुर के मुखिया रामविनोद ठाकुर व कलौंजर की मुखिया शोभा देवी ने बताया कि संभावित बाढ़ को देखते हुए नौका मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। किचन शेड, दवा, पशु चारा, शौचालय आदि के लिए ऊंचे स्थलों का चयन कर लिया गया है।

बाढ़ की आशंका से सहमे किसान नहीं बो रहे धान

सिंघिया। मानसून प्रवेश करते ही पिछले कई दिनों से रूक-रूक कर हो रही मुसलाधार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश से प्रखंड होकर बहने वाली कमला, जीवछ व करेह के जलस्तर में वृद्धि जारी है। इससे अत्यधिक बाढ़ प्रभावित हरदिया, महरा, बंगरहट्टा, वारी, क्योटहर आदि पंचायतों में धान की रोपनी शुरू नहीं हो पाई है। धान के बिचड़े का प्रबंध होने के बाद भी नदियों के जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार देख धान की रोपनी से किसान परहेज कर रहे हैं। विदित हो कि प्रखंड की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। पिछले साल आई बाढ़ में किसानों के धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। पिछले साल हुई फसल क्षति का लाभ भी अब तक किसानापें को नहीं मिला है।

लगातार बारिश से बढ़ रही बाढ़ की आशंका

मोहिउद्दीननगर। लगातार बारिश से गंगा के जलस्तर में बृद्धि होने से हाजीपुर- बाजिदपुर रिंग बांध की निगरानी बढ़ा दी गई हैं। हालांकि अभी तक गंगा की उपधारा वाले ढाब में भी पानी नहीं आई है। इधर अधिक बारिश के कारण बाढ़ आपदा विभाग की ओर से रिंग बांध पर चौकसी बढ़ा दी गई है। बांध की मरम्मत पहले ही की जा चुकी है। जबकि मिट्टी भरी प्लास्टिक बोरे भी बांध की गैप वाली जगहों पर रखकर मरम्मत की जा चुकी है। इधर बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्र का बीडीओ कृष्ण कुमार सिंह व सीओ प्रमोद कुमार रंजन ने कई बार दौरा कर उसकी निगरानी शतर्कता के साथ की है। सीओ ने बताया कि बाढ़ की खतरे से निपटने के लिए तैयारी कर ली गई है। नाव व बांध की रक्षा के लिए हम सभी पूरी तरह चौकस हैं।

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