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समस्तीपुर

तालाब पर अतिक्रमण से डूबता है अनुमंडल अस्पताल

हिन्दुस्तान टीम,समस्तीपुरPublished By: Newswrap
Sun, 01 Aug 2021 10:41 PM
जगह-जगह स्थायी एवं अस्थायी अतिक्रमण, प्रशासन एवं प्रतिनिधियों की उदासीनता तथा प्रशानिक मिलीभगत ने जल संचयन व पर्यावरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण शहर...
1 / 2जगह-जगह स्थायी एवं अस्थायी अतिक्रमण, प्रशासन एवं प्रतिनिधियों की उदासीनता तथा प्रशानिक मिलीभगत ने जल संचयन व पर्यावरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण शहर...
जगह-जगह स्थायी एवं अस्थायी अतिक्रमण, प्रशासन एवं प्रतिनिधियों की उदासीनता तथा प्रशानिक मिलीभगत ने जल संचयन व पर्यावरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण शहर...
2 / 2जगह-जगह स्थायी एवं अस्थायी अतिक्रमण, प्रशासन एवं प्रतिनिधियों की उदासीनता तथा प्रशानिक मिलीभगत ने जल संचयन व पर्यावरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण शहर...

यूनियन बोर्ड से अधिसूचित क्षेत्र समिति व नगर पंचायत का सफर तय करने के बाद अंग्रेजकालीन दलसिंहसराय शहरी निकाय अब नगर परिषद बन चुका है। इस बड़े कालखंड में शहरी क्षेत्र की आबादी ही नहीं बढ़ी, नवनिर्माण एवं विकास कार्यों के धरातल पर उतरने से इसका स्वरूप भी बदल गया। लेकिन स्वहित में जगह-जगह स्थायी एवं अस्थायी अतिक्रमण, प्रशासन एवं प्रतिनिधियों की उदासीनता तथा प्रशानिक मिलीभगत ने जल संचयन व पर्यावरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण शहर के तालाब एवं बलान नदी की पुरानी सूरत को भी बदल कर रख दिया है। इसका खामियाजा जलजमाव के रूप में लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बावजूद दस संबंध में प्रशासन कोई खास कार्रवाई नहीं कर सका है। इससे शहर के पुराने क्षेत्र स्थित लोकनाथपुर गंज (वार्ड 13) में अनुमंडल अस्पताल के पास अवस्थित तालाब अपना अस्तित्व खोने के कगार पर है। 2019 में तालाब, नहर, पइन, नदी एवं अन्य जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने से संबंधित राज्य सरकार के आदेश के बाबजूद इस तालाब के पुराने स्वरूप को बहाल नहीं किया जा सका है। हालत यह है कि तीन ओर से पक्की सड़क एवं निर्मित भवनों के बीच स्थित तालाब पसरी जलकुंभी के कारण लोगों की नजर से ओझल सा हो गया है। अस्थायी एवं स्थायी अतिक्रमण के साथ ही अवैध कब्जा के कारण तालाब का क्षेत्रफल छोटा होने, तालाब में हर तरफ से वर्षा के पानी के आने के रास्ते का बन्द होने एवं तालाब के भर जाने पर सड़क के दूसरी ओर जलनिकासी के लिए बने भमरों को बन्द कर देने से अब वर्षा होने पर अनुमंडल अस्पताल परिसर में तालाब का पानी पसरकर लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। तालाब की उड़ाही नहीं होने से यह उथला हो गया है। इसके सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव भी नप ने लिया था। लेकिन जल जीवन हरियाली योजना के तहत भी इस तालाब में कुछ भी नहीं किया जा सका है। बरसात खत्म होते ही इसका जलग्रहण क्षेत्र सुख जाता है तथा इसमे उग आये जंगलों के कारण सभी इससे दूर-दूर ही रहते हैं। बताते हैं थाना नम्बर 72 के तीन अलग-अलग खेसरा में विभक्त भूखंड में 2 एकड़ 39 डी. पोखर, 36 डी. पोखर भिंडा एवं 41 डी. भूमि की किस्म परती कदीम है। इस भूखंड में से लोगों ने जमीन क्रय कर पक्का मकानों का निर्माण किया है। अंचल कार्यालय में संबंधित क्रेताओं की जमाबंदी भी कायम है तथा क्रेताओं का संबंधित भूखंड पर कब्जा भी है। इस संबंध में 2011-14 तक यहां सीओ रहे विजय कुमार तिवारी ने तीनों खेसरा की भूमि का सीमांकन कराने के उपरांत तीन दर्जन से अधिक लोगों को अतिक्रमणकारी बताकर अतिक्रमण खाली करने के लिए नोटिस भी निर्गत किया था। तब अपने-अपने दावे व प्रतिदावे के साथ संबंधित लोगों ने सीओ की इस कार्रवाई को एकपक्षीय एवं बेबुनियाद बताकर विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में है। हालांकि नप ईओ राकेश कुमार रंजन का कहना है कि तालाब के भूखंड से संबंधित जमाबन्दी रद्दीकरण करने का मामला एडीएम के यहां लंबित है। उन्होंने कहा कि विवादरहित क्षेत्र में तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य जल्दी ही प्रारंभ कराया जाएगा।

सौंदर्यीकरण के नाम पर थाना तालाब में बंद कर दिए गए पानी आने के सभी रास्ते

दलसिंहसराय थाना के पास दो अलग-अलग समय में तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर 35 लाख से अधिक रुपये खर्च कर दिए गए। लेकिन इस क्रम में तालाब में पानी आने के सभी रास्ते बंद कर दिए जाने से तालाब में पानी का ही अभाव हो गया। वर्षा होने या भूमिगत जलस्तर के ऊपर आने पर तालाब में पानी जरूर जमा होता है। लेकिन छठ के समय पास स्थित पीएचइडी के पम्प से कई दिनों तक तालाब में पानी डालकर घाट तक पानी पहुंचाया जाता है। 2016 में दूसरे चरण में किये गए सौंदर्यीकरण के दौरान तालाब की ओर से बनाया गया प्रोटेक्शन वाल 2020 में दूर तक ध्वस्त हो गया। तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में जलकुंभी पसरी हुई है। इसके भिंड पर बनाये गए पथ पर भी अलग-अलग समय में किसी न किसी रूप में अतिक्रमण नजर आता है। परिणाम है कि लाखों खर्च के बाद भी शहर के लोगों को सौंदर्यीकरण का लाभ नहीं मिल सका।

बलान नदी क्षेत्र में भी फल फूल रहा जमीन कब्जाने का धंधा

दलसिंहसराय शहर की लाइफ लाइन कही जानेवाली बलान नदी क्षेत्र की भूमि को भी कब्जियाने का धंधा फलता फूलता रहा है। शहरी क्षेत्र में खाली भूखंडों की बढ़ी कीमतों ने पास बसे लोगों के अलावे जमीन की खरीद विक्री में शामिल लोगों का भी नदी ने अपनी ओर ध्यान खींचा है। हद तो यह है कि नदी के जलग्रहण क्षेत्र में भी निर्माण कार्य एवं इसकी संरचना है। इससे जुड़े लोगों के अपने-अपने दावे एवं प्रतिदावे हैं। ऐसे लोग अपने कब्जा को वैध करार देते हैं। वहीं सरकारी महकमा इस ओर से उदासीन बना है। जिसके कारण बलान नदी के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडराने लगा है। इसका असर जल संचयन, भूमिगत जलस्तर एवं पर्यावरण पर असर डाल रहा है। बाबजूद स्वहित में सम्बन्धित लोग एवं संबंधित विभाग व पदाधिकारी इस समस्या को नजरअंदाज करते रहे हैं।

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