जाम और अतिक्रमण से शहर बेहाल वेंडिंग जोन बने तो मिलेगी राहत
जिले के शहरों में वेंडिंग जोन की कमी एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती बन गई है। रोसड़ा, दलसिंहसराय और अन्य शहरों में सड़कें अतिक्रमण के कारण प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से जल्द वेंडिंग जोन विकसित करने की मांग की है ताकि जाम और अव्यवस्थित ठेलों की समस्या का समाधान किया जा सके।
जिले के शहरों में वेंडिंग जोन का अभाव अब गंभीर प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है। खासकर अनुमंडल मुख्यालय वाले शहरों रोसड़ा, दलसिंहसराय, शाहपुर पटोरी और ताजपुर में सड़कें लगातार अतक्रिमण के घेरे में हैं। इसके कारण आवागमन बाधित हो रहा है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति रोसड़ा नगर में है, जो कि जिले के सबसे पुराने नगर निकायों में से एक है। 1869 में रोसड़ा नगर पालिका की स्थापना के डेढ़ सौ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आज तक यहां एक भी समुचित वेंडिंग जोन विकसित नहीं हो सका है। यह प्रशासनिक उदासीनता का स्पष्ट उदाहरण है, जिसका खामियाज़ा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
रोसड़ा शहर के मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र टावर चौक पर स्थिति सबसे विकट है। एसएच 88 के एक पूरे लेन पर फुटपाथी दुकानदारों, सब्जी-फल विक्रेताओं और ठेला-फेरी वालों का स्थायी अतक्रिमण बना रहता है। सड़क के सिकुड़ने से यहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। अक्सर राहगीरों को पैदल चलने तक की जगह नहीं मिलती, वहीं वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद नगर परिषद और प्रशासन की ओर से कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। समय-समय पर केवल औपचारिक अभियान चलाकर सड़क खाली कराई जाती है, लेकिन कुछ ही घंटों में स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है। सिनेमा चौक से महावीर चौक के बीच स्थित पुरानी अस्पताल के समीप सड़क किनारे लगने वाली अनियोजित सब्जी मंडी आवागमन में और बाधा डालती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में यहां विक्रेताओं और खरीदारों की भीड़ सड़क पर फैल जाती है, जिससे जाम की स्थिति कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि इस मार्ग से स्कूल, अस्पताल और बाजार के लिए बड़ी संख्या में लोग रोज गुजरते हैं, मगर भीड़ और अव्यवस्थित ठेलों के कारण कई बार आपातकालीन वाहन भी निकलने में असमर्थ हो जाते हैं। समस्तीपुर जिला मुख्यालय हो या अन्य अनुमंडल शहर लगातार बढ़ती आबादी, बढ़ते व्यावसायिक दबाव और शहरों के क्षैतिज वस्तिार ने वेंडिंग जोन की आवश्यकता को और महत्वपूर्ण बना दिया है। प्रदेश के अन्य कई शहरों में सड़क किनारे अतक्रिमण को नियंत्रित करने के लिए व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित किए गए हैं, जहां लाइसेंसधारी फेरीवालों को स्थान दिया गया है। परंतु जिले के शहरों में अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ रहा है, बल्कि आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों, बाजार समितियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से जल्द से जल्द शहरों में वेंडिंग जोन विकसित करने, अतक्रिमण हटाने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने, तथा सड़क किनारे लगने वाली अनियोजित मंडियों को चह्निति स्थानों पर स्थानांतरित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शहरों में नियोजित वेंडिंग जोन बना दिए जाएं, तो न केवल जाम की समस्या कम होगी बल्कि फुटपाथी दुकानदारों को भी व्यवस्थित जगह मिल सकेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित रहेगी। वेंडिंग जोन बनने से व्यवसाय में स्थिरता आएगी और शहर की यातायात व्यवस्था भी सुधरेगी।
बोले जिम्मेदार-
सभी अनुमंडल स्तर पर जाम की समस्या के निदान को लेकर उपाय किया जा रहा है। सड़क पर अतिक्रमण जहां भी कर रखा गया है उसको हटाया जा रहा है। वहीं वेंडिंग जोन को लेकर भी जमीन का चयन किया जा रहा है। इसको लेकर सभी एसडीओ व नगर निकाय के पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिया गया है। जमीन चिन्हित होते ही आगे का प्लान तैयार किया जाएगा।
-रोशन कुशवाहा, डीएम

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