मानसून पूर्व तैयारी अधूरी, शहर जलजमाव की आशंका से सहमा
रोसड़ा में मानसून सक्रिय होने में एक माह का समय शेष है, लेकिन नगर परिषद की तैयारियों में कमी दिख रही है। हाल की बारिश ने जलजमाव की समस्याओं को उजागर किया है। पुराने नालों की सफाई धीमी चल रही है और नई जलनिकासी व्यवस्था का निर्माण नहीं हो पाया है। स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

रोसड़ा। मानसून सक्रिय होने में अब महज एक माह का समय शेष रह गया है। मौसम विभाग द्वारा 10 जून के बाद सूबे में मानसून के प्रवेश की संभावना जतायी गयी है, लेकिन रोसड़ा नगर परिषद क्षेत्र में अब तक मानसून पूर्व तैयारियों में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है। हाल के दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने ही नगर परिषद प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। शहर के कई मोहल्लों एवं सड़कों पर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जलनिकासी की समस्याएँ
मिली जानकारी के मुताबिक जिन नालों के निर्माण की स्वीकृति पूर्व में मिल चुकी थी, उनका निर्माण कार्य भी अब तक पूरा नहीं कराया जा सका है। वहीं पुराने नालों की उराही का कार्य भी बेहद धीमी गति से चल रहा है। शहर से जलनिकासी की कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं बन पायी है। ऐसे में यदि इस वर्ष भी पिछले साल की तरह अच्छी बारिश हुई तो शहर के डूबने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बरसात के दिनों में रोसड़ा के कई निचले इलाकों में घरों में पानी घुस जाना और लोगों का आवागमन बाधित होना मानो आम बात बन चुकी है। स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि जलजमाव होने पर प्रशासन को आनन-फानन में जेसीबी लगाकर कच्चा नाला काटकर पानी निकासी का अस्थायी उपाय करना पड़ता है। बताया जाता है कि करीब तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन एसडीओ द्वारा शहर में ड्रेनेज सिस्टम एवं संप हाउस निर्माण का निर्देश दिया गया था। नगर परिषद ने प्रारूप भी तैयार किया था, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
सड़कों की स्थिति
वार्ड संख्या 11 और 12 को जोड़ने वाली सड़क, जो अरविंद सिंह के घर से महादेव मठ प्राथमिक विद्यालय तक जाती है, उसकी स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। इस मार्ग में कहीं-कहीं कच्चा नाला है, जबकि अधिकांश हिस्से में नाला ही नहीं बना है। कस्तूरबा विद्यालय और स्व. विजय सिंह के घर के समीप बने कच्चे नाले में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से सालभर गंदा पानी जमा रहता है, जिससे आसपास के लोग दुर्गंध से परेशान रहते हैं। बरसात के दौरान इस पूरे इलाके में जलजमाव की गंभीर स्थिति बन जाती है। इसी प्रकार प्रमोद मिश्र के घर से दिलीप टेक्निकल कॉलेज होते हुए तपस्वी बाबा मंदिर तक जाने वाली सड़क की हालत भी बदतर है। यहां बने कच्चे नालों में सालभर पानी जमा रहता है और बरसात में स्थिति नारकीय हो जाती है। शहर के कई वार्डों में अब तक पक्के नालों का निर्माण नहीं हो सका है। वहीं जहां नाले बने भी हैं, वहां निर्माण की गुणवत्ता और जलनिकासी की उचित ढाल नहीं होने के कारण वे बेकार साबित हो रहे हैं।
स्थायी समाधान की मांग
अधिकांश कच्चे नालों में पॉलीथिन और कचरे का अंबार लगा हुआ है, जिससे नाले बजबजा रहे हैं और दुर्गंध फैल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक दशक से जलनिकासी व नाला निर्माण की समस्या को लेकर आवाज उठायी जा रही है, लेकिन नगर परिषद प्रशासन की इच्छाशक्ति अब तक जागृत नहीं हो सकी है। लोगों ने मानसून से पूर्व कार्रवाई कर स्थायी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
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