खानपुर थाना क्षेत्र में बढ़ रहा सूखा नशा का प्रचलन
खानपुर थाना क्षेत्र में सूखा नशा तेजी से फैल रहा है। मिडिल स्कूल खानपुर के पीछे कई युवक दिन-रात गांजा और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस नशे के कारण लोग अकेले बगीचे से गुजरने में डरते हैं। हाल ही में एक युवक का शव भी इसी क्षेत्र से बरामद हुआ है।

खानपुर। खानपुर थाना क्षेत्र में सूखा नशा का प्रचलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। मिडिल स्कूल खानपुर के पीछे गाछी सहित अन्य कई जगहों पर सुखा नशा करने वाले नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। इसको देख कर लोगों में दहशत का माहौल बनता जा रहा है।
नशे का अड्डा
मिडिल स्कूल खानपुर के पीछे गाछी क्षेत्र को लोग सूखा नशा करने का अड्डा मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के कई बगीचे नशा करने वाले युवकों का अड्डा बन चुका है। जहां सुबह से देर रात तक गांजा, सिगरेट, एविल इंजेक्शन, सॉल्यूशन और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है। ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मिडिल स्कूल खानपुर के पीछे बगीचे में रोजाना सूखा नशा करने वाले युवकों का जमावड़ा लगा रहता है। 5 से 6 युवकों की टोली बनाकर खुलेआम नशा किया जाता है। नशीली पदार्थों की बिक्री भी होती है। रुपए लेनदेन को ले कर अक्सर आपसी मारपीट और विवाद की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
सुरक्षा चिंताएं
लोगों का कहना है कि थाना क्षेत्र के कई चाय और पान दुकानों से आसानी से गांजा, नशीले सिगरेट और अन्य नशीली सामग्री उपलब्ध हो जाती है। जिससे युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग अब अकेले बगीचा से होकर आने जाने से डरने लगे हैं। लोगों को आशंका रहती है कि कहीं नशे में धुत युवक उनके साथ अभद्र व्यवहार न करे। कई ग्रामीणों ने बताया कि अब वे समूह में ही बगीचे की ओर जाते हैं।
हालिया घटनाएं
मंगलवार को खानपुर थाना क्षेत्र के मोहम्मद आजाद का शव खानपुर मिडिल स्कूल के पीछे बगीचे से बरामद हुआ था। ग्रामीणों का दावा है कि मृतक युवक भी सूखे नशे का आदी था। घटनास्थल से एफएसएल टीम ने गांजा, चिलम और स्प्राइट की बोतल से बना हुक्का भी बरामद किया था। इसके बाद पूरे क्षेत्र में सूखे नशे की चर्चा और तेज हो गई है। मौके पर मौजूद लोग भी दबे मुंह नशे के बढ़ते कारोबार की बात करते नजर आए। बगीचे में जगह जगह इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन, नीडल और एविल के खाली इंजेक्शन मिलने से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि इलाके के युवा नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 16 से 25 वर्ष की उम्र के युवक सबसे अधिक इस लत के शिकार हो रहे हैं। सूचना मिलने पर पुलिस जब तक पहुंचती है, भनक लगते ही नशेड़ी अड्डा पर से भाग जाते हैं।
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