जन औषधि: सस्ती दवाओं से राहत उपलब्धता संकट से मरीज बेहाल
प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना के तहत, जनऔषधि केंद्रों से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं। यह योजना गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। हालांकि, केंद्रों पर दवाओं की कमी भी एक समस्या है। लोग सीएचसी में जनऔषधि केंद्र खोलने की मांग कर रहे हैं।

देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और सस्ती बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना धीरे-धीरे लोगों के जीवन में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत स्थापित जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से अब आमजन को गुणवत्तापूर्ण जेनरिक दवाइयां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है, क्योंकि पहले सामान्य बीमारियों जैसे बुखार, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के इलाज में ही दवाइयों पर खर्च बहुत अधिक हो जाता था। वहीं अब इन केंद्रों से मिलने वाली सस्ती दवाओं के कारण रोगियों का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हुआ है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इन केंद्रों का विस्तार इस उद्देश्य से किया जा रहा है ताकि हर वर्ग का मरीज सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवा प्राप्त कर सके। स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि निजी मेडिकल स्टोरों पर मिलने वाली दवाइयों की कीमतें अक्सर बाजार में कई गुना अधिक होती हैं। वहीं, जनऔषधि केंद्रों पर वही दवाइयां 50% से लेकर 90% तक सस्ती दरों पर उपलब्ध हैं। हालांकि, राहत के बीच निराशा का माहौल भी देखने को मिल रहा है। कई बार मरीजों को जरूरी दवा लेने के लिए जनऔषधि केंद्र का रुख करना पड़ता है, लेकिन वहां आवश्यक दवा उपलब्ध न होने पर उन्हें निराश लौटना पड़ता है। ऐसे में मजबूरीवश गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। बोले समस्तीपुर कार्यक्रम के दौरान लोगों ने इस समस्या पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान रौशन यादव ने बताया कि उनके एक रिश्तेदार को ब्लड प्रेशर की दवाई की जरूरत थी। लेकिन जब वह समस्तीपुर स्टेशन पर स्थित जनऔषधि केंद्र गये तो वहां वह दवा उपलब्ध नहीं थी। मजबूरी में उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर दवा खरीदनी पड़ी। कमीशनखोरी का खुला खेल : बोले समस्तीपुर कार्यक्रम के दौरान लोगों ने बताया की कई डॉक्टर फार्मा कंपनियों से कमीशन, महंगे गिफ्ट और टूर पैकेज पाते हैं। इसी वजह से वे मरीजों को ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं। यदि डॉक्टर साल्ट का नाम लिखें तो मरीज को वही दवा जनऔषधि केंद्र से आधी कीमत पर मिल सकती है। लेकिन डॉक्टर और फार्मा कंपनियों की मिलीभगत से गरीब मरीज महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर होते हैं। हालांकि जन औषधि केंद्र के संचालक की भी अपनी समस्या है। स्टेशन चौक पर जनऔषधि केंद्र चलाने वाले संचालक कहते हैं कि वे पूरे दिन दुकान खोलकर बैठे रहते हैं, लेकिन ग्राहकों की कमी से उनका व्यवसाय चल नहीं पाता। कारण साफ है की डॉक्टर निजी कंपनियों की दवाएं ही लिखते हैं, जिससे मरीज सीधे निजी मेडिकल स्टोर पर चले जाते हैं। सभी सीएचसी व सरकारी अस्पतालों में केंद्र खोलने की मांग : लोगों ने ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जनऔषधि केंद्र खोले जाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की महंगाई पहले से ही बड़ी समस्या रही है। अगर सीएचसी पर ये केंद्र खुल जाते हैं तो गांव-देहात में रहने वाले लोगों को भी सस्ते दामों पर बेहतर दवाइयां मिल सकेंगी। ----------बोले जिम्मेदार------------- स्टेट से ही जिले में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोलने का ठेका मिला है। जिले में कई जगह जनऔषधि केंद्र संचालित हैं और वहां दवाओं का स्टॉक है। अगर शिकायत मिलती है तो इसकी जांच की जाएगी। लोगों से अपील है की जन औषधि केंद्र से सस्ती दवाएँ खरीदें। -डॉ. एसके चौधरी, सिविल सर्जन, समस्तीपुर
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


