DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शहर में जलजमाव, निकासी को फंड नहीं

शहर में जलजमाव, निकासी को फंड नहीं

मानसून के बाद थोड़ी बारिश क्या हुई, मानो पटोरी की सड़कों पर चलना मना हो गया। शहर की सड़कों पर जल-जमाव इस कदर हो गया है कि मानो वहां नदी बह रही हो। बंद पड़े नालों में जमा मल-जल भी सड़कों पर आ गया है, जिससे होकर लोगों के आने-जाने की मजबूरी बन गई है। इससे भी बदतर स्थिति शहर से गांवों की ओर जाने वाली सड़कों की हो चुकी है। सच यह है कि सड़कों की बदहाली के कारण लोग बहुत आवश्यक कार्य होने की स्थिति में ही घर से बाहर निकलते हैं। इसकी परवाह न ही विधायक को है और न ही सांसद को। शायद इसीलिए क्योंकि वे जनता के इस दर्द को महसूस करने कभी आते नहीं या फिर अगर आते हैं तो अपने लक्जरी वाहनों से जहां उन्हें इस तकलीफ का एहसास भी नहीं होता।

दो दशक में नाले के निर्माण पर खर्च हुए 20 से 25 करोड़ रुपए : पटोरी को आज तक नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिला। इसके कारण जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह पंचायतों के जिम्मे है। शहर का मुख्य हिस्सा हसनपुर सूरत, चकसलेम एवं शाहपुर उंडी पंचायत के अंतर्गत आता है। इन तीन पंचायतों में नाला निर्माण के लिए विभिन्न योजना मद से पिछले दो दशक में लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं परंतु इन नालों से बूंद भर पानी की भी निकासी नहीं होती है। नाला निर्माण में राशि की लूट का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि एक दशक में एक ही नाला का निर्माण दो बार पंचायत की राशि से, दो बार जिला परिषद की राशि से, एक बार विधायक फंड से और एक बार पंचायत समिति की राशि से की गयी। इसके बावजूद पानी नाले में नहीं जाकर सड़कों पर ही फैला रहता है। पंचायतों को नाला निर्माण की राशि तो दी जाती है परंतु नालों की उड़ाही के लिए कोई फंड नहीं दिए जाते। लोग जब जल-निकासी की समस्या लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष जाते हैं तो वे भी नेताओं की तरह आश्वासन देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं क्योंकि अधिकारियों के पास भी इस कार्य के लिए कोई फंड आवंटित नहीं है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:No water reservoir, drainage in the city