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समस्तीपुर

मधुश्रावणी : साज शृंगार के साथ फूल लोढने निकलती हैं नवविवाहिताओं की टोली

हिन्दुस्तान टीम,समस्तीपुरPublished By: Newswrap
Tue, 03 Aug 2021 04:50 AM
मधुश्रावणी : साज शृंगार के साथ फूल लोढने निकलती हैं नवविवाहिताओं की टोली

शाम ढलते ही गांव की नवविवाहितों की टोलियां सजधज कर एवं साज शृंगार के साथ फूल-पत्ती लोढ़ने निकल जाती है। इस दौरान गाये जाने वाले नचारी एवं विषहरी गीत अनायास ही लोगों को अपने ओर आकर्षित कर लेती है। पिछले एक सप्ताह से गांव की पगडंडियां एवं बाग बगीचा प्रत्येक दिन शाम में गुलजार रहती है। जहां नवविवाहिताएं अपनी सखी सहेलियों के साथ विभिन्न प्रकार की फूल व पत्तियां लोढ़ती है। मिथिला में प्रत्येक वर्ष सावण मास में नागपंचमी के दिन से ही मधुश्रावणी पर्व का आगाज किया जाता है, जो 15 दिनों तक चलता है। दांपत्य जीवन में केवल एक बार ही इस पर्व को मनाया जाता है। शादी के बाद पहले सावन में नवविवाहिता अपने दांपत्य जीवन में सुख शांति के लिए इस पर्व को श्रद्धापूर्वक करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत पूजन से वैवाहिक जीवन में स्नेह और सुहाग बना रहता है। मधुश्रावणी व्रत को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह और उमंग नवविवाहिता कन्याओं में देखने को मिलता है। नवविवाहित कन्याएं श्रावण कृष्ण पंचमी के दिन से सावन शुक्ल तृतीया तक यानी 15 दिनों तक दिन में बस एक समय भोजन करती हैं। आमतौर पर कन्याएं इन दिनों में मायके में रहती हैं और साज शृंगार के साथ नियमित शाम में फूल चुनती हैं और डाला सजाती हैं। फिर इस डाले के फूलों से अगले दिन विषहर यानी नागवंश की पूजा करती हैं। श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन इस पर्व का समापन मधुश्रावणी के रूप में होता है। इस पूरे पर्व के दौरान 15 दिनों की अलग-अलग कथाएं हैं। जिनमें मधुश्रावणी दिन की रोचक कथा राजा श्रीकर और उनकी बेटी की है। जिले के उजियारपुर, खानपुर, शिवाजीनगर, रोसड़ा, कल्याणपुर, वारिसनगर सहित अन्य प्रखंड क्षेत्रों में बड़े ही आस्था एवं श्रद्धा के साथ नवविवाहिता इस पूर्व को मनाती है। ऐसा माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद व्रति किसी भी प्रकार को पेय पदार्थ भी ग्रहण नहीं करती है।

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