पुराने हॉस्टल भवन को अवैध तरीके से तोड़ा
समस्तीपुर के काशीपुर स्थित प्लस टू तिरहुत एकेडमी के हॉस्टल भवन को बिना अनुमति के जेसीबी से तोड़ दिया गया। तोड़ने के दौरान कई कीमती सामान गायब हो गए। प्रिंसिपल ने अनुमति नहीं लेने की बात कही है और डीईओ ने भी फोन नहीं उठाया। यह प्रक्रिया कानूनी नियमों का पालन किए बिना की गई है।

समस्तीपुर। शहर के काशीपुर स्थित प्लस टू तिरहुत एकेडमी के मैदान में करीब 3-4 कठ्ठे में फैला काफी पुराने छात्र-हॉस्टल भवन को अवैध तरीके से जेसीबी लगा कर आनन फानन में तोड़ कर हटाया जा रहा है। तोड़ने के क्रम में इसमें बंद पड़े करीब 15 आलमीरा, 14 पंखे, 15-20 चौकी, कई बेंच, 10 रैक आदि कई कीमती सामान हटा कर कहां रखे गए, इसके बारे में वर्तमान प्रभारी हेडमास्टर सही से जवाब नहीं दे पा रहे हैं। उनसे यह पूछने पर कि स्कूल हॉस्टल भवन को तोड़ने से पहले उन्होंने सक्षम प्राधिकार से अनुमति ली थी, एनओसी के अलावा अन्य प्रक्रिया को पूरा किया गया तथा तोड़ने के बाद इसके कीमती सामान कहां गए, इस पर उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि वे हॉस्टल भवन को नहीं तोड़वा रहे हैं, पूर्व के हेडमास्टर तोड़वा रहे हैं।
तोड़ने के क्रम में सभी सामान स्कूल में ही हैं। डीपीओ, माध्यमिक प्रेम शंकर झा ने हॉस्टल प्रकरण पर बताया कि उनसे तिरहुत एकेडमी के प्रभारी हेडमास्टर ने अनुमति नहीं ली है। कहीं डीईओ से उन्होंने अनुमति ली होगी।जब डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता के सरकारी मोबाइल नबंर पर कई बार फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। पुराने हॉस्टल भवन को आनन - फानन में पूर्ण वैधानिक प्रक्रिया को पूरा किए बिना तोड़ने को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। जानकर लोगों का कहना है कि सरकारी हाई स्कूल का कोई भी पुराने व जर्जर भवन को तोड़ने से पहले प्रबंध समिति की बैठक आयोजित कर बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लेकर भवन निर्माण विभाग व नगर निगम से एनओसी लेकर व टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर तोड़ने का निर्णय लिया जा सकता है। तोड़ने के बाद भवन से निकाले गए सामानों को वैधानिक तरीके से डाक प्रक्रिया अपना कर प्राप्त राशि को स्कूल के खाते में जमा करना पड़ता है। इतनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं, यह संदेह के घेरे में है। इस पर सही स्थिति की जानकारी नहीं दी जा रही है।
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