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1 अक्तूबर, 2020|7:47|IST

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खेतों में जमा ही है बाढ़-बरसात का पानी

खेतों में जमा ही है बाढ़-बरसात का पानी

जिले में बाढ़ व बरसात ने किसानों को मुश्किल हालात में डाल रखा है। अत्यधिक बारिश और बाढ़ के कारण जिले में अधिकांश खेत अब भी जलजमाव की शिकार है। ऐसे में खेती चौपट होने से किसान मायूस हैं। एक तो खेत में लहलहा रही धान व मक्के के साथ सब्जी की खेती मारी गयी गयी वहीं अब खेत में पानी लगे रहने के कारण रबी की खेती पर भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। जिनके खेत ऊंचे स्थान पर है उनके खेत से तो एक महीने में पानी निकल जाएगा, लेकिन जिनका खेत निचले इलाकों में हैं उन्हें दो महीने से भी अधिक खेती के लिए इंजतार करना होगा।

कल्याणपुर: प्रखंड में बाढ़ और बारिश के कारण सैकड़ों एकड़ में लगी खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है। कल्याणपुर थाना के नजदीक नहर जाम रहने के कारण पानी की निकासी नहीं होने से कल्याणपुर, लदौरा, मधुरापुर, जितवरिया, मालीनगर, सैदपुर एवं हजपुरवा आदि जगहों के किसानों को रबी की खेती करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जिस खेत से बाढ़ का पानी निकल गया है वहां के किसान खेती की तैयारी करने में लग गये हैं। वे बैगन, टमाटर, बोरा एवं अन्य सब्जी की खेती करेंगे। रजपा के किसान राधेश्याम ठाकुर, मधुबन के मो इफ्तेखार अहमद, फूलहारा के भारत भूषण शर्मा, अंजना के रामदेव महतो, भोला कुमार, मिल्की के सुरेंद्र प्रसाद सिंह एवं जितवारिया के विपिन शर्मा ने बताया कि निकासी की व्यवस्था नहीं होने से के कारण खेतों में जलजमाव है। निचले क्षेत्र के खेतों में अब भी 3 से 4 फीट पानी है। सितंबर के अंत तक पानी निकलने की संभावना है। इससे अक्टूबर से लोग रबी की खेती की तैयारी में जुटेंगे। वैसे बाढ़ और बारिश से खेत में जलजमाव से धान, मक्का, सब्जी सहित अन्य खरीफ फसलों को काफी नुकसान हुआ है।

प्रखंड कृषि समन्वयक मनीष रंजन ने बताया कि खेतों में बाढ़ और बारिश का पानी हट जाने के बाद किसान आकस्मिक फसल की खेती भी कर सकते हैं। सितंबर महीना के प्रथम पक्ष में दलहन में अरहर के प्रभेद बहार शरद, पूसा 9 की बुआई के साथ ही परवल, बैगन एवं फूलगोभी की खेती कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसान गाजर, भिंडी, बोरा, टमाटर आदि की भी बुआई कर सकते हैं, वहीं सितंबर के द्वितीय पक्ष में शकरकंद की खेती की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर से रबी की खेती की तैयारी की जा सकेगी। नवंबर के प्रथम पक्ष से लेकर दिसंबर तक आलू, मक्का एवं गेहूं की खेती कर सकते हैं। बीएओ अरुण चौधरी ने बताया कि बाढ़ से प्रखंड में 5394 हेक्टेयर में खरीफ की फसल बर्बाद हुई है।

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  • Web Title:Flood and rain water are stored in the fields