समय से पहले खाद जुटाने लगे किसान
समस्तीपुर | निप्र : इजरायल अमेरिका- ईरान युद्ध के कारण किसानों पर खाद की किल्लत का असर दिखने लगा है। किसान महंगी कीमतों पर खाद खरीद रहे हैं। डीएपी खाद की कीमत 1350 रुपये निर्धारित है, लेकिन 1800 से 1900 रुपये में बेची जा रही है। कृषि विभाग ने खाद विक्रेताओं को बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।

समस्तीपुर | निप्र : इजरायल अमेरिका- ईरान युद्ध के कारण और सोशल मीडिया पर फैल रही विभिन्न अफवाहों का असर अब किसानों पर भी दिखने लगा है।जिले में धान की खेती शुरू होने में अभी करीब एक महीने बाकी हैं, लेकिन किसान अभी से ही खाद खरीदकर भंडारण करने में जुट गए हैं। आशंका है कि आने वाले दिनों में खाद की किल्लत हो सकती है, इसी डर से किसान अधिक कीमत देकर भी खाद खरीद रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिले के कई इलाकों में डीएपी और यूरिया खाद निर्धारित कीमत से अधिक दर पर बेची जा रही है। डीएपी खाद की सरकारी कीमत 1350 रुपये प्रति बैग निर्धारित है, लेकिन किसानों से 1800 से 1900 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। वहीं यूरिया की कीमत 266.50 रुपये प्रति बैग होने के बावजूद 300 से 350 रुपये में बिक्री की जा रही है। मुसरीघरारी के किसान बलवंत चौधरी का कहना है कि बाजार में यह चर्चा तेज है कि युद्ध और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण आगे खाद की भारी कमी हो सकती है। इसी वजह से लोग जरूरत से पहले ही खाद खरीदकर घरों में जमा कर रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि दुकानदार खुलेआम अधिक कीमत मांग रहे हैं और मजबूरी में उन्हें महंगा खाद लेना पड़ रहा है।
खाद बिक्री पर रोक
इधर जिला कृषि विभाग ने खाद विक्रेताओं को फिलहाल खाद बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय और सरकारी प्रक्रिया के तहत ही खाद की बिक्री की जाएगी। इसके बावजूद जिले के कई इलाकों में चोरी-छिपे खाद बेचे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि कई दुकानों पर बिना पॉश मशीन के ही खाद की बिक्री की जा रही है।
कालाबाजारी का प्रभाव
किसानों से नकद राशि लेकर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। इससे कालाबाजारी को बढ़ावा मिल रहा है और छोटे किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय किसानों को कृषि विभाग की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए। वहीं प्रशासन से खाद की कालाबाजारी रोकने और निर्धारित मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक युवा किसान ने बताया कि उन्होंने 19 सौ रुपए में डीएपी की बोरी खरीदी है जबकि 330 रुपए से अधिक कीमत में यूरिया की बोरी की खरीदारी की है। यूरिया बैग की वर्तमान कीमत 266.50 रुपए और डीएपी की कीमत 1350 रुपए प्रति बोरी है।
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