
महिलाओं ने थामी लोकतंत्र की डोर, सुबह से ही बूथों पर लगी रही कतारें
रोसड़ा में मतदान के दौरान महिलाओं ने अपनी भागीदारी से लोकतंत्र की ताकत को साबित किया। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर महिलाएं कतार में खड़ी रहीं, अपने अधिकार का सम्मान करते हुए। कई महिलाओं ने कहा कि उनका वोट ऐसी सरकार को जाएगा जो उनकी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए काम करेगी।
रोसड़ा। मतदान के इस पावन पर्व पर रोसड़ा की सुबह कुछ अलग थी। सूरज की पहली किरणें जैसे ही धरा पर पड़ीं, गांव की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक एक शांत लेकिन दृढ़ कदमों वाली आवाजाही शुरू हो गई। उमवि रहुआ स्थित बूथ संख्या 388, 389 और 390 के बाहर सुबह सात बजते बजते मानो पूरा वातावरण एक प्रतीक्षा गीत गुनगुनाने लगा। कतारों में खड़ी महिलाएं, कुछ घूंघट में, कुछ हंसमुख चेहरों के साथ अपने मताधिकार को जैसे अपने सम्मान की चुनरी में पिरोकर लेकर आई थीं। पुरुषों की मौजूदगी तो थी, लेकिन आज हवा में महिलाओं का हौसला ही मुखर था।

किसी ने अपने बच्चे को गोद में लिए रखा, किसी ने कंधे पर रखी थाली छोड़कर पहले लोकतंत्र का मान रखा। सुबह 11 बजे तक यहां 40 प्रतिशत मतदान दर्ज हो चुका था। मध्य विद्यालय मब्बी के बूथों पर भी यही दृश्य, धीमे कदमों की कतार में सधे आत्मविश्वास की चमक। कतार में खड़ी रूबी देवी, कौशल्या देवी, नारायणी कुमारी सहित कई महिलाओं ने कहा कि उनका वोट ऐसी सरकार को जाएगा, जो महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम उठाए। दोपहर होते हल्की थकान और धूप से रफ्तार कुछ धीमी हुई, पर दो बजे के बाद मानो महिलाओं के हौसले ने फिर से हवा का रुख बदल दिया। शाम ढलने लगी, पर कई बूथों पर कतारें मानो कह रही थीं, लोकतंत्र इंतजार के धैर्य से ही फलता है। मध्य विद्यालय ढरहा के बूथ संख्या 313 पर तो शाम साढ़े पांच बजे तक महिलाएं कतार में खड़ी रहीं। मतदाता के इस उत्साह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता की सहभागिता में निहित है, और इस बार उसकी अगुआई महिलाओं ने पूरी मजबूती से की।

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