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26 अक्तूबर, 2020|12:41|IST

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डॉक्टर्स डे : धरती के भगवान पर बढ़ा विश्वास

डॉक्टर्स डे : धरती के भगवान पर बढ़ा विश्वास

कोरोना संकट काल में एक बार फिर लोगों ने डॉक्टरों को धरती का भगवान मान लिया है। उन्होंने जिस तरह अपनी सुख सुविधा व परिवार की चिंता छोड़ कोरोना पीड़ितों की सेवा की उससे उनके प्रति लोगों की श्रद्धा बढ़ गयी। डॉक्टरों की मेहनत के कारण कई कोरोना पीड़ितों को नयी जिंदगी मिली। जिससे लोगों मेें एक बार फिर धरती के भगवान पर आस्था बढ़ी है।

कोरोना संक्रमण काल में जहां लोग अपनों के पास भी जाने से डरते थे, वहीं डॉक्टर अपनों को भूलकर मरीजों की सेवा में लगे रहते थे। जिसके कारण परिवार व बच्चे को दूर से ही प्यार व स्नेह दे रहे हैं। पिछले तीन महीने से अधिक समय से डॉक्टर परिवार से दूर होकर अस्पताल में कोरोना पीड़ितों की सेवा में लगे हैं।

सदर अस्पताल के अलावे अनुमंडलीय स्तर पर बने आईसोलेशन केंद्र में डॉक्टर व कर्मी कोरोना पीड़ितों को बचाने में लगे हैं। इसी का परिणाम है कि जिले में कोरोना संक्रमित व्यक्ति के मृत्यु की संख्या मात्र दो है। ऐसा नहीं कि धरती के भगवान को कोरोना संक्रमण का डर नहीं होता, लेकिन अपना बचाव करते हुये दायित्व का निर्वहन भी कर रहे हैं। इस दौरान परिवार से इनकी दूरी बच्चों को ज्यादा खल रही है। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल से लौटने के बाद दूसरे रास्ते से घर में दाखिला लेते हुए सीधे बाथरूम में पहुंचते हैं। जहां स्नान करने के बाद कपड़े की सफाई करते हैं। घर पर भी परिवार के सदस्यों से अलग ही रहते हैं। चाहकर भी बच्चे को गोद नहीं ले पाते हैं, लेकिन अस्पताल में जब छोटा बच्चा पहुंचता है तो वहां उसकी जिंदगी बचाने के लिये सब कुछ करना होता है।

व्यवसाय बनाने वालों को याद दिलानी होगी शपथ

समस्तीपुर। मेडिकल की शिक्षा पूरी करने के बाद डॉक्टरों को डिग्री देते समय मरीजों की सेवाभाव से इलाज करने की शपथ दिलायी जाती है। लेकिन कुछ डॉॅक्टर पैसे ही चकाचौंध में उस शपथ को भूल मरीजों से पैसे दोहन के तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं। मरीजों की सेवाभाव से इलाज करने वाले शहर के डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे डॉक्टरों को उनके शपथ की शद दिलानी जरूरी है।

डॉक्टर्स डे पर डॉक्टर अपनी शपथ को याद करते हुए समाज व मरीज के प्रति इमानदारी से कर्तव्यों का निर्वहन करें। चिकित्सा को व्यवसाय नहीं सेवाभाव से करना चाहिये। कुछ डॉक्टर पेश से अलग होकर इसे व्यवसाय बना लिये हैं, ऐसे लोगों को डिग्री के समय लिये गये शपथ को याद दिलाना चाहूंगा।

-डॉ. आरएन सिंह, अध्यक्ष, आईएमए

लोग डॉक्टर को धरती का भगवान मानते हैं। लेकिन बदलते परिवेश में कुछ लोगों के कारण सभी डॉक्टर बदनाम हो रहे हैं। कमीशन से बचते हुये गरीब मरीजों का बेहतर इलाज करना चाहिये। कमाई का कोई अंत नहीं है। भूल सुधारने की जरुरत है। समाज में डॉक्टर की छवि काफी बेहतर है। इसे बरकरार रखने की जरुरत है।

- डॉ. शबनम गुप्ता, कोषाध्यक्ष, आईएमए

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