सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बढ़ा प्रदूषण व बीमारियों का खतरा
शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर सरकारी प्रतिबंध के बावजूद इसका उपयोग और बिक्री जारी है। पॉलीबैग, थर्मोकोल और अन्य सामग्री का खुला उपयोग हो रहा है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। नाले प्लास्टिक से जाम हो रहे हैं और मवेशी बीमार हो रहे हैं। नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
रकारी स्तर पर सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद शहर में इसका उपयोग और बिक्री बेरोकटोक जारी है। पॉलीबैग, थर्मोकोल, प्लास्टिक कप, प्लेट और अन्य प्रतिबंधित सामग्री का दैनिक उपयोग खुलेआम किया जा रहा है। इसके चलते शहर में प्लास्टिक आधारित कचरा तेजी से फैल रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। शहर के नाले प्लास्टिक कचरे से जाम हो रहे हैं, जिससे हर बरसात में जलजमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। खाली मैदान, सड़कों के किनारे, नदी, तालाब और पोखर प्लास्टिक कचरे से अटे पड़े हैं।
मवेशी इस कचरे को खाने से बीमार पड़ रहे हैं, वहीं कई जगहों पर प्लास्टिक कचरे को जलाए जाने से निकलने वाली जहरीली गैसें सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दे रही हैं। जागरूक नागरिकों का कहना है कि बिहार सरकार ने 1 जुलाई 2022 से 75 माइक्रोन से पतले सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों जैसे कैरी बैग, कप, प्लेट, चम्मच आदि के उत्पादन, आयात, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। नियमों के उल्लंघन पर आम लोगों के लिए 500 से 2000 रुपये तक जुर्माना, जबकि उद्योगों के लिए 20 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक जुर्माना या 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री आज भी आम लोगों को आसानी से उपलब्ध हो रही है, जिससे यह कानून कागजों तक ही सीमित नजर आता है। शहर के बाजारों में सब्जी विक्रेता, दुकानदार और ग्राहक बेझिझक सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कर रहे हैं। जूट, कागज या बायोडिग्रेडेबल विकल्पों का प्रयोग लगभग कहीं दिखाई नहीं देता। चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थों के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक कप का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी, गैर-सरकारी और निजी कार्यालयों में बैठकों और आयोजनों के दौरान भी प्लास्टिक कप और पैकिंग सामग्री का खुलेआम प्रयोग किया जा रहा है। होटल और रेस्टोरेंटों में गर्म खाद्य पदार्थ प्लास्टिक कैरी बैग में पैक कर दिए जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। आंकड़ों के अनुसार, शहर से प्रतिदिन लगभग 50 से 60 टन कचरा निकलता है, जिसमें करीब 18 टन प्लास्टिक कचरा होता है। लैंडफिल स्थलों पर अब तक 15 लाख टन से अधिक कचरा जमा हो चुका है, जिससे कचरे के पहाड़ खड़े हो गए हैं। प्लास्टिक निस्तारण की समुचित व्यवस्था न होने से प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर निगम द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक के लिए कभी-कभार छिटपुट छापेमारी जरूर की गई, लेकिन इसे लोग केवल कागजी खानापूर्ति मानते हैं। पिछले वर्ष कुछ बाजारों में प्रतिबंधित सामग्री की जब्ती और जुर्माना वसूली की गई थी, जो पूरी तरह नाकाफी साबित हुई। जिला प्रशासन के निर्देश पर नगर निगम में छापामार दस्ता भी गठित किया गया था, जिसमें अधिकारी और कर्मी शामिल हैं, लेकिन यह दस्ता अब तक शोपीस बनकर रह गया है। नियमों के अनुसार इस दस्ते को पुलिस की मदद से वार्डवार छापेमारी करनी है, दोषियों से ऑन-स्पॉट जुर्माना वसूलना है और हर कार्रवाई की रिपोर्ट जिलाधिकारी तथा नगर विकास विभाग को भेजनी है। लेकिन दो वर्ष पहले हुई छापेमारी के बाद से अब तक किसी ठोस कार्रवाई के संकेत नहीं मिलते।
बोले जिम्मेदार-
एकल उपयोग वाले प्लास्टिक की शहर में बिक्री और उपयोग पर सरकार के द्वारा लगी रोक के नियमों का पालन कराने के लिए नगर निगम में छापामार दस्ता बना हुआ है। यह दस्ता समय समय पर छापेमारी कर प्रतिबंधित उत्पादों की जब्ती कर जुर्माना लगाने की कार्रवाई करता रहता है। प्लस्टिक कचरे के शहर में फैलाव को रोकने पर निगम प्रशासन गंभीर है। इसके लिए आम लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है। सभी का इसमें सहयोग भी आवश्यक है।
-अनिता राम, मेयर, नगर निगम

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