
अवैध स्टैंडों में वसूली से बढ़ा बस संचालकों का दर्द, सुनवाई भी नहीं
जिले में 1500 से अधिक बसें हैं, जो आम आदमी को गंतव्य तक पहुंचाने में मदद करती हैं। बस चालकों को अवैध वसूली, दुकानदारों के दबाव और प्रशासनिक उपेक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ड्राइवर कल्याण योजना के तहत उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
जिले में करीब 15 सौ से अधिक बसें है। आम आदमी को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में इनकी भूमिका अहम है। बस के संचालन से करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। शहर में एकलौता बस स्टैंड कर्पूरी बस पड़ाव है। जहां से लगभग करीब एक दर्जन जिला के लिए बस खुलती है। लेकिन बस चालकों को कई परेशानियों से होकर गुजरना पड़ता है। लगभग सही रूट में कुकुरमुत्ते की तरह उगे बस स्टैंड में अवैध राशि देनी होती है। बुधवार को हिन्दुस्तान बोले अभियान के तहत प्राइवेट बस संचालकों ने अपनी समस्याओं को साझा किया। ड्राइवर सुजीत सिंह ने कहा कि प्राइवेट बस चालकों को अक्सर सड़कों पर अपनी बसें खड़ी करनी पड़ती हैं, लेकिन दुकानदारों द्वारा इन बसों को हटाने का दबाव होता है।
यह स्थिति उस समय और अधिक गंभीर हो जाती है, जब यात्री बस में सवार होते हैं। दुकानदारों का दबाव उन्हें बस को हटाने के लिए मजबूर करता है। इससे न केवल चालक को परेशानी होती है, बल्कि यात्री भी असहज महसूस करते हैं। सड़क पर मामूली विवादों में भी बस चालकों को हमेशा दोषी ठहरा दिया जाता है। रामसूरत सिंह ने कहा कि चाहे वह यात्री के साथ विवाद हो या अन्य वाहन चालकों से जुड़ी कोई समस्या, बस चालकों को हमेशा प्रशासन और स्थानीय जनता से उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। जगह के अभाव में कई बार बसों को कई बार भीड़-भाड़ के बीच खड़ी करनी पड़ती है। जिससे यात्री भी असुविधा महसूस करते हैं। बस चालकों को यह समस्या दिन-प्रतिदिन झेलनी पड़ती है। अत्याधुनिक स्टैंड, सड़क की मरम्मत और यातायात की व्यवस्था में सुधार की कोई ठोस योजना नहीं है, जो बस चालकों की समस्याओं को कम कर सके। स्टैंड पर चार्ज तो लिया जाता है, लेकिन कई बाजारों और मुख्य स्थानों पर बसों के लिए उचित स्टैंड की सुविधा नहीं है। इससे चालक और यात्री दोनों को परेशानी होती है, और कई बार जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बहुत सी बार अधिकारी बसों में यात्रा करते हैं, लेकिन जब बात असुविधाओं की आती है तो वे चुप रहते हैं। अधिकारी समस्या के समाधान के बजाय अपनी यात्रा में व्यस्त रहते हैं। और इससे बस चालकों की परेशानियों में कोई कमी नहीं आती। हमारे लिए टाइम टेबल का पालन करना मुश्किल होता है। परमीट के हिसाब से सही दिशा-निर्देश नहीं मिलते। कई बार हमें स्टैंड के बजाय सड़क पर खड़ा होना पड़ता है। इससे जाम की समस्या पैदा होती है। सरोज राय ने कहा कि बस चालकों और कंडक्टरों के लिए आयुष्मान कार्ड और राशन कार्ड बनना चाहिए। इससे उनके स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद मदद मिलेगी। इसके बिना, वे कई बार अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान में असमर्थ होते हैं। बस चालकों का समय सारणी (टाइम टेबल) हमेशा परमिट के हिसाब से होना चाहिए। इससे न केवल यात्री सेवा में सुधार होगा, बल्कि चालक भी सही समय पर अपने काम को पूरा कर सकेंगे। काम के अनुरूप वेतन में वृद्धि मिले बस चालकों का वेतन उनके काम के अनुरूप नहीं है। वे कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं और कई घंटों तक यात्रियों की सेवा करते हैं। बस चालकों एवं कंडक्टर के लिए केंद्र सरकार द्वारा ड्राइवर कल्याण योजना बनाई जा रही है। जिसे परिवहन विभाग के द्वारा जल्द ही कार्यान्वयन में लाया जाएगा। इस योजना से सभी बस चालकों को लाभ होगा। ड्राइवर कल्याण योजना के तहत सभी चालकों का हेल्थ चेकअप अनिवार्य रूप से होगा। साथ ही उनके बच्चों की देखभाल एवं शिक्षा व्यवस्था का भी ख्याल रखने की योजना है। इसके लागू हो जाने से चालकों की बहुत सारी समस्याओं का निदान हो जाएगा। -विवेक चन्द्र पटेल, डीटीओ

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




