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सकरी-जयनगर रेलखंड पर सौ किमी की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेन

रेलमंडल के सकरी-जयनगर रेलखंड पर अब सौ किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से ट्रेनें दौड़ेंगी। इसके लिए लगभग 14 करोड़ की लागत से सकरी-जयनगर रेलखंड पर स्लीपर बदलने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। मार्च 2019...

सकरी-जयनगर रेलखंड पर सौ किमी की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेन
सकरी-जयनगर रेलखंड पर सौ किमी की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेन
हिन्दुस्तान टीम,समस्तीपुरThu, 25 Oct 2018 11:16 PM
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रेलमंडल के सकरी-जयनगर रेलखंड पर अब सौ किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से ट्रेनें दौड़ेंगी। इसके लिए लगभग 14 करोड़ की लागत से सकरी-जयनगर रेलखंड पर स्लीपर बदलने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। मार्च 2019 से पहले ही स्लीपर बदलने का कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्लीपर बदलने के बाद इस रेलखंड पर मालगाड़ी व सवारी गाड़ी सौ से अधिक की गति में चलायी जा सकती है।

फिलहाल इस रेलखंड पर मालगाड़ी 60 किलोमीटर की गति में चलायी जा रही है, वहीं सवारी गाड़ी 80 किलोमीटर की रफ्तार से चलायी जा रही है। कार्य को तेज गति से पूरा करने के लिए रेलवे ट्रैक रिलेईंग ट्रेन (टीआरटी) से सकरी-जयनगर रेल खंड पर स्लीपर बिछाने का काम किया जा रहा है। इससे पूर्व रेलवे मजदूरों की मदद से स्लीपर लगाने का कार्य शुरू किया था। लेकिन एक साल में मात्र 11 किलोमीटर तक स्लीपर ही बिछ सका। इसको लेकर ट्रेनों की गति को प्रतिबंधित कर परिचालन किया जा रहा था। इससे बचने के लिए टीआरटी मशीन की मदद ली जा रही है।

एक किलोमीटर में 1660 स्लीपर : सकरी-जयनगर रेलखंड पर पहले एक किलोमीटर में1310 स्लीपर लगाए गए थे। इस रेलखंड पर मालगाड़ी के चलने के बाद जगह-जगह स्लीपर क्षतिग्रस्त हो गए। ट्रैक को मजबूत करने के लिए अब इस ट्रैक पर प्रति किलोमीटर में 1660 स्लीपर लगाए जा रहे हैं, ताकि सभी ट्रेनों को एक गति में चलाया जा सकेगा।

38 किलोमीटर में कार्य करेगा टीआरटी : सकरी-जयनगर रेलखंड पर फिलहाल 49 किलोमीटर में स्लीपर बिछाने का कार्य को पूरा किया जाना है। मजदूरों के द्वारा 11 किलोमीटर में कार्य को पूरा किया जा चुका है। अब शेष 38 किलोमीटर में टीआरटी मशीन से स्लीपर बिछाया जाएगा। इस कार्य में लगभग 14 करोड़ से अधिक की राशि खर्च होने की संभावना है।

गति प्रतिबंध के साथ कम आयेगी लागत

‘टीआरटी मशीन से स्लीपर बिछाने के बाद रेलवे ट्रैक अधिक मजबूत होगा। इसके बाद इस रेलखंड पर सौ से अधिक की स्पीड में ट्रेनें चलायी जा सकेंगी। कार्य को मार्च 2019 से पहले तक पूरा कर लिया जाएगा।

-बीके सिंह, सीनियर डीईएन को-ऑर्डिनेशन, रेल मंडल