स्नेहलता, साक्षी, माधव या आलोक? दीपक प्रकाश हटे तो RLM से उपेंद्र कुशवाहा का मंत्री कौन
Samrat Cabinet RLM Minister: दीपक प्रकाश का सम्राट सरकार में मंत्री बने रहना मुश्किल होता दिख रहा है। दीपक को हटाने के लिए PIL दायर हुई है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा को रालोमो से दूसरा मंत्री बनाने का ऑफर मिल सकता है।

Samrat Choudhary Cabinet RLM Minister: राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा का सम्राट चौधरी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने रहना मुश्किल सा दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने उन्हें विधान परिषद चुनाव में कैंडिडेट नहीं बनाया, जिससे वो 6 महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य बनने का एक बेहतरीन मौका गंवा चुके हैं। MLA या MLC बने बिना दोबारा मंत्री बने दीपक प्रकाश को हटवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है, जिस पर आज सुनवाई हो सकती है। 25 साल पहले दीपक प्रकाश जैसे एक मामले में कोर्ट ने पंजाब में तेज प्रकाश सिंह के दोबारा मंत्री बनने को असंवैधानिक और अवैध बताया था। सुनवाई में कोर्ट स्वाभाविक रूप से आज नोटिस जारी करेगा, जिससे दीपक प्रकाश पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट में दीपक प्रकाश को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका दाखिल होने की खबर आने से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा था कि दीपक को मंत्री (दोबारा) बने एक ही महीना हुआ है, इसलिए वो इस्तीफा नहीं देंगे। कुशवाहा दीपक के किसी सदन का सदस्य बनने के 6 महीने की समय सीमा को 7 मई से जोड़ रहे हैं, जब वो दूसरी बार मंत्री बने थे। दीपक नीतीश कैबिनेट में नवंबर में ही पहली बार मंत्री बने थे और उनका 6 महीना 20 मई को पूरा होता, लेकिन उससे पहले नीतीश ने कैबिनेट भंग करते हुए इस्तीफा दे दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में 1995 और 1996 में कांग्रेस की दो सरकारों में मंत्री बने तेज प्रकाश सिंह के मामले में स्पष्ट कर दिया था कि विधानसभा में किसी गैर-सदस्य मंत्री का 6 महीने वाले प्रावधान का लाभ दूसरी बार लेना गलत है। कोर्ट ने इसे संविधान की भावना के अनुरूप नहीं माना। कोर्ट ने कहा था कि इस्तीफा के कुछ अंतराल के बाद या सरकार पुनर्गठन के रास्ते बिना सदस्य बने दोबारा मंत्री बनना अवैध है। दीपक का केस सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के आधार पर सीधा, सपाट और उनके खिलाफ दिख रहा है।
उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को पटना में अपनी पार्टी रालोमो के प्रदेश सम्मेलन में कहा था कि वो एक पद के लिए अपनी पार्टी के अस्तित्व को खत्म नहीं कर सकते। कुशवाहा भाजपा में विलय के ऑफर को ठुकराने का इशारा कर रहे थे, जिसका असर दीपक प्रकाश को एमएलसी नहीं बनाने के रूप में सामने आया है। कुशवाहा ने यह भी कहा था कि वो एनडीए में थे, एनडीए में हैं और एनडीए में रहेंगे। इस बयान से यह स्पष्ट है कि कुशवाहा एनडीए में टिके रहेंगे और भाजपा के साथ मोल-भाव करने में जुटे रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की वजह से दीपक अगर इस्तीफा देते हैं तो कुशवाहा को भाजपा रालोमो से किसी दूसरे को मंत्री बनाने का विकल्प दे सकती है।
बीवी-बहू या तेवर दिखा रहे विधायकों में किसी एक को मंत्री बनाएंगे कुशवाहा?
यह एक काल्पनिक स्थिति की बात है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद वह समय तेजी से आता दिख रहा है, जब कुशवाहा को दीपक प्रकाश के इस्तीफे पर फैसला करना पड़ सकता है। भाजपा दीपक के बदले कुशवाहा से सम्राट सरकार में रालोमो कोटे से दूसरे नेता को मंत्री बनाने का ऑफर दे सकती है। कुशवाहा फिर से परिवार पर भरोसा करते हैं तो उनकी विधायक पत्नी स्नेहलता कुशवाहा के साथ-साथ उनकी बहू साक्षी मिश्रा भी एक मजबूत दावेदार हो सकती हैं। लेकिन, साक्षी का भी किसी सदन का सदस्य नहीं होना बाधा है, जिसकी वजह से दीपक पर तलवार लटकी है।
कुशवाहा ने पार्टी के बाकी तीन विधायकों में किसी को बनाया तो माधव आनंद या आलोक सिंह का भाग्य चमक सकता है। ये दोनों सवर्ण हैं। रामेश्वर महतो का नंबर लगा तो कुशवाहा के पिछड़ा वोटर फील गुड कर सकते हैं। लेकिन, इन तीनों की विश्वसनीयता कुशवाहा की नजरों में गिर चुकी है। जब दीपक को पहली बार मंत्री बनाया गया था, तब तीनों विधायकों ने तेवर दिखाए थे। स्नेहलता को छोड़ दें तो तीनों विधायक तालमेल में दिखते हैं। सबका भाजपा से बात-व्यवहार भी ठीक है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा इन तीन में किसी को भी मंत्री बनाकर और ताकतवर बनाने का रिस्क लेंगे, लगता नहीं है।
आरएलएम सूत्रों का कहना है कि पार्टी में दीपक की पत्नी साक्षी काफी सक्रिय हैं। कुशवाहा दीपक को विधानसभा में महुआ से लड़ाना चाहते थे। लेकिन, बीजेपी ने सीट चिराग पासवान को दे दी। तब कुशवाहा भड़क गए थे तो नित्यानंद राय रात में चार्टर प्लेन से उनको अमित शाह से मिलवाने दिल्ली ले गए थे। तब कहा गया था कि रालोमो को 6 सीट, बीजेपी और जेडीयू के सिंबल पर कुशवाहा के 2 और कैंडिडेट के अलावा राज्यसभा और एमएलसी की एक सीट का भरोसा मिला है। कहा जाता है कि MLC सीट के वादे पर भाजपा पर दबाव बनाए रखने के मकसद से दीपक को मंत्री बनवाने का आयडिया साक्षी ने ही दिया था। लेकिन कथित तौर पर कुशवाहा द्वारा पार्टी का विलय करने से मना करने पर भाजपा ने दीपक प्रकाश को नजरअंदाज कर दिया।


