चौड़ी सड़क का सपना, अव्यवस्था में बदलती हकीकत
सहरसा, हिटी। शहर में लगातार बढ़ती यातायात समस्या अब आमजन के लिए गंभीर चिंता

सहरसा, हिटी। शहर में लगातार बढ़ती यातायात समस्या अब आमजन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। मुख्य मार्गों से लेकर अंदरूनी सड़कों तक हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। लोग घंटों तक सड़कों पर फंसे रहने को मजबूर हैं। इस अव्यवस्था के पीछे कई कारण हैं, लेकिन इनमें एक अहम कारण नगर निगम द्वारा लगाए जा रहे लाइट पोल भी माने जा रहे हैं। लाइट पोल यदि सड़क के सही किनारे लगाए जाएं तो व्यवस्था को सुधार सकते हैं, लेकिन वर्तमान में इन्हें गलत स्थानों पर लगाया जा रहा है, जिससे समस्या और विकराल होती जा रही है।
सड़क के बीच खड़े पोल बन रहे अतिक्रमण का आधार: शहर के कई इलाकों में देखा जा सकता है कि लाइट पोल सड़क से सटा कर या फुटपाथ के मध्य लगा दिए गए हैं। इससे न केवल सड़क की चौड़ाई कम हो रही है, बल्कि यह अतिक्रमण को भी बढ़ावा दे रहा है। पोल के सहारे दुकानदार तिरपाल तान लेते हैं, ठेले वाले स्थायी रूप से खड़े हो जाते हैं और कुछ लोग अस्थायी निर्माण तक कर लेते हैं। धीरे - धीरे यह अतिक्रमण स्थायी रूप ले लेता है, जिसे हटाना प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है। नतीजा यह होता है कि पहले से ही संकरी सड़कें और अधिक संकरी हो जाती हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि लाइट पोल सड़क के बिल्कुल किनारे, नालियों या डिवाइडर के पास लगाए जाएं, तो सड़क का मध्य भाग पूरी तरह वाहनों के लिए उपलब्ध रहेगा। इससे सड़कों की चौड़ाई साफ नजर आएगी और लोगों में अतिक्रमण करने की मानसिकता भी कम होगी। साथ ही पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ सुरक्षित रहेंगे। इससे दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी और यातायात व्यवस्था सुचारु हो सकेगी। यह एक ऐसा व्यावहारिक समाधान है, जिस पर अमल करना नगर निगम के लिए कठिन नहीं है। जाम से जूझते शहर में नगर निगम की भूमिका पर सवाल: शहरवासी सवाल उठा रहे हैं कि जब नगर निगम यातायात सुधार और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं की बात करता है, तो फिर ऐसी बुनियादी गलतियां क्यों की जा रही हैं। लाइट पोल लगाने से पहले क्या सड़क की चौड़ाई, भविष्य के ट्रैफिक दबाव और पैदल यात्रियों की जरूरतों का आकलन नहीं किया जाता? कई जगहों पर तो हाल ही में बनी सड़कों पर भी पोल गलत ढंग से खड़े कर दिए गए हैं, जिससे नई सड़कों का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार - बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। जब जाम लगता है तो आमजन परेशान होता है, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं की जाती। यदि शुरुआत में ही सही योजना और समन्वय के साथ काम किया जाए, तो बाद में अतिक्रमण हटाने, सड़क तोड़ने और दोबारा निर्माण पर होने वाला खर्च भी बच सकता है। कुल मिलाकर, शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स से ज्यादा जरूरी है कि छोटी लेकिन असरदार गलतियों को सुधारा जाए। लाइट पोल की सही प्लानिंग ऐसा ही एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना यह है कि नगर निगम समय रहते इस ओर ध्यान देता है या फिर शहर की रफ्तार यूं ही गलत फैसलों की भेंट चढ़ती रहेगी।

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