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29 नवंबर, 2020|4:36|IST

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कष्टों से मुक्ति का मां से मांगा आशीर्वाद

कष्टों से मुक्ति का मां से मांगा आशीर्वाद

नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को मां कुष्मांडा की अराधना हुई। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण देवी को कुष्मांडा नाम दिया गया है।आठ भुजाएं होने के कारण कुष्मांडा अष्टभुजा कहलाती है। मां के सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं।आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। माँ कुष्माण्डा अपने भक्तों पर हमेशा कृपा दृष्टि रखती है।

इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं।सही पूजा विधि से मां कुष्मांडा प्रसन्न होती हैं।मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। मां कूष्मांडा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं। इनकी आराधना करने से भक्तों को तेज, ज्ञान, प्रेम, उर्जा, वर्चस्व, आयु, यश, बल, आरोग्य और संतान का सुख प्राप्त होता है।भक्तों ने श्रद्धा भाव और विधि विधान से मां दुर्गा के कुष्मांडा रूप की अराधना कर कष्टों से मुक्ति का आशीर्वाद मांगा। कोरोना से मुक्ति के लिए मां की अराधना किया।

नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा देवी की हुई पूजा: महिषी। दुर्गा पूजा के दिनों के बढ़ने के साथ ही भक्तों में पूजा के लिए उत्साह और धर्मस्थलियों पर भीड़ के बढ़ने का क्रम शुरू हो गया है। यूं कोरोना एवं आदर्श आचार संहिता के कारण अन्य वर्षों की अपेक्षा लोगों के आने जाने का सिलसिला कम है। मंगलवार को महिषी स्थित उग्रतारा मंदिर, महपुरा स्थित कारु मंदिर, नाकुच स्थित नकुचेश्वर महादेव मंदिर, कन्दाहा स्थित सूर्य मंदिर सहित अन्य मंदिरों में अहले सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचकर मां दुर्गा के चौथे कुष्मांडा रूप का पूजन कर मनोकामना सिद्धि की कामना की। इधर महासप्तमी, महाष्टमी, महानवमी एवं महादशमी को होने वाले विशेष पूजा को लेकर तारास्थान में रंग रोगन एवं रौशनी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।

सौरबाजार से सं.सू. के अनुसार प्रखंड में नवरात्रा पर्व को लेकर भक्तिमय माहौल बना हुआ है। घरों और मंदिरों में लोग अहले सुबह से ही दुर्गा पाठ शुरू कर देते हैं। मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग के तहत पूजा अर्चना की जाती है। कहीं भी इस बार मेला का आयोजन नहीं किया जा रहा है।

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  • Web Title:Salvation from sufferings is sought from mother