DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सहरसा के मटेश्वरधाम को अब तक पर्यटन विभाग से नहीं मिली मान्यता

अनुमंडल के प्रसिद्ध मटेश्वर धाम कांठो बलवाहाट राजनैतिक एवं प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। न्यास समिति से संबद्ध मंदिर को पर्यटन विभाग ने अभी तक मान्यता नही मिल पायी है। रात में यात्रा के लिए दुरूह मार्ग मानसी-सिमरी बख्तियारपुर- मटेश्वर धाम रेल के रिटायर्ड पुल एवं कांवरिया पथ दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहा है। चंद दिन कांवर यात्रा के शेष रहने के वावजूद भी अभी तक कांवरिया पहुंच पथ की सुदृढ़ व्यवस्था के लिए प्रशासनिक पहल शुरू नही हुई है।

कोसी क्षेत्र के प्रसिद्ध मटेश्वर धाम कांठो बलवाहाट आस्था एवं श्रदा का केंद्र लगातार बना हुआ है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां बाबा का जलाभिषेक कर पुजा अर्चना कर मनोवांछित फल की कामना करने आते हैं। बड़ी संख्या में राजनीतिक दल के नेता एवं वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी भी यहां पुजा अर्चना करने पहुंचते हैं। लेकिन इसे अभी तक पर्यटन विभाग के मैप में भी नहीं आ सका है। जव कि यहां श्रद्धालुओं की चिर प्रशिक्षित मांग है, कि सरकार मटेश्वर धाम को पर्यटन स्थल घोषित करें।

सरकारी स्तर से नहीं लगाई जाती मेला: बिहार में श्रावणी मेला के नाम पर कुल 10 प्रसिद्ध मंदिर में राज्य सरकार के माध्यम से मेला लगाया जाता है। पड़ोस स्थित पूर्णिया जिले के बनमनखी मुख्यालय स्थित धीमेशवर नाथ महादेव मंदिर परिसर में श्रावणी मेला 2019 के आयोजन के लिए राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बिहार द्वारा 9 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। धीमेशवर नाथ महादेव मंदिर परिसर में सरकारी स्तर से एक महीने के लिए सार्वजनिक होता रहा है। इस कोसी एवं सीमांचल क्षेत्र में धिमेश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर में सरकारी स्तर से आयोजित होने वाला एकमात्र है।

बिहार में 10 स्थानों पर लगाए जाते सरकारी श्रावणी मेला: श्रावणी मेला बांका, भागलपुर, मुगेंर, लखीसराय, जमुई, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, हाजीपुर, पहलेजा घाट सोनपुर में भी सार्वजनिक मेला का आयोजन सरकारी स्तर से किया जाता है। इसके लिए विभाग द्वारा सरकारी राशि आवंटित की जाती है। जव कि मटेश्वर धाम कांठो न्यास समिति के द्वारा न्यास समिति पटना को कुल मंदिर राजस्व का आय का 4 प्रतिशत प्रत्येक वर्ष दिया जाता हैं।

कांवरिया पथ जर्जर, दुर्घटना की आशंका: वैसे तो सावन 17 जुलाई से प्रारंभ हैं। लेकिन श्रावणी मेला 22 जुलाई सोमवार से शुरू हो रहा है। लेकिन अभी तक कांवरिया पथ मानसी- सहरसा रेलखंड सहित कांवरिया सड़क पथ की हालत नहीं सुधरी है। कांवरिया जान हथेली पर रखकर भगवान् भोले के भरोसे यात्रा करने के लिए बाध्य होगे। पिछले दिनों इस पथ पर रेल पुल पार करने के दौरान ट्रेन के आ जाने के कारण कोसी नदी में कांवरिया ने छलांग लगा कर अपनी जान गंवा दी थी।

सहरसा-खगड़िया प्रशासन कांवरिया पथ के लिए सजग नहीं: सावन की प्रत्येक रविवार की रात हजारों कांवरिया इस रास्ते से जलकर भर कर मटेश्वरधाम पहुंचते हैं। बलवा हाट में हर वर्ष प्रसिद्ध श्रावणी मेला के अवसर पर मुंगेर जिले के छर्रा पट्टी गंगा नदीं घाट से कांवरिया एवं डाकबम की टोली जल भरकर खगड़िया, मानसी, बदला घाट, धमारा घाट, फेनगो हॉल्ट, कोपरिया रेलवे स्टेशन, गोरगामा रेलवे ढ़ाला तक सहरसा - मानसी रेलखंड के पथरीली मार्ग होकर जलाभिषेक करने पहुंचते है। इस रेलखंड मार्ग में कांवरिया डाकबम एवं अन्य शिव भक्तों को कई पुराने जर्जर 4 रेलपुल होकर गुजरने पर दुर्घटना की आशंका लगी रहती है। रेल प्रशासन एवं सहरसा एवं खगड़िया जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट नहीं हो पाता है। जबकि पिछले वर्ष भी रेल पुल से डाक एवं कांवरिया बम निचे पानी में गिर चुका है।

क्या कहते हैं अधिकारी: सिमरी बख्तियारपुर एसडीएम विरेंद्र कुमार ने कहा कांवरिया पथ की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खगड़िया के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। वही श्रावणी मेला को लेकर मटेश्वर धाम मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए मजिस्ट्रेट, महिला एवं पुरूष पुलिस बल सहित अन्य उपायों की व्यवस्था की जाएगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:saharsa simri bakhtiarpur mateshwardham tourism department not recogniged