
बाजार में तिल और गुड़ की फैलने लगी सौंधी सुगंध
सहरसा में मकर संक्रांति के त्यौहार के लिए तिलकुट बनाने का काम तेज हो गया है। यहाँ के दुकानदारों ने गयाजी के कुशल कारीगरों को बुलाकर विभिन्न प्रकार के तिलकुट तैयार करवा रहे हैं। सर्दियों में तिलकुट की मांग बढ़ जाती है और एक महीने में लगभग एक हजार क्विंटल तिलकुट की खपत होती है।
सहरसा, नगर संवाददाता । सहरसा में मकर संक्रांति के त्यौहार को ध्यान में रखते हुए तिलकुट बनने लगा है। बाज़ारों में धीरे-धीरे तिल, गुड की सौधी सुगंध फैलने लगी है। सहरसा के लोगों को गयाजी जैसे स्वादिष्ट तिलकुट का स्वाद चखाने के लिए बाहर से भी कारीगर आ चुके हैं और विभिन्न प्रकार के तिलकुट तैयार किए जा रहे हैं। ठंड के मौसम और मकर संक्रांति के आगमन के साथ ही तिलकुट की मांग बढ़ जाती है।डिमांड को देखते हुए स्थानीय दुकानदार द्वारा गयाजी सहित अन्य जगहों से कारीगर लाकर तिलकुट तैयार करवा रहे हैं। दिसम्बर महीने के शुरुआत से ही तिलकुट बनाने का काम तेज हो गया है।जैसे-जैसे

मकर संक्रांति नजदीक आएगा तिलकुट का कारोबार ओर भी बढ़ेगा। फरवरी तक तिलकुट की सोंधी महक इसी तरह फैली रहेगी।तिलकुट बनाने की प्रक्रिया में तिल को भूनना, कूटना और सही तापमान पर गुड़ मिलाना शामिल है, जिसके लिए विशेष कौशल की आवश्यकता होती है।जिसमें गयाजी के कारिगर निपुण होते हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर दुकानदार गयाजी व आसपास से कारिगर बुला कर तिलकुट तैयार करवाने लगे हैं। हाल के वर्षों में यह सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है। जिसके कारण सहरसा के लोगों को अपने हीं शहर में शानदार तिलकुट का स्वाद मिलने लगा है।स्वास्तिक तिलकुट दुकान संचालक रोहित कुमार ने बताया कि बीते कई वर्षों से गयाजी के कारीगरों के द्वारा तिलकुट बनवाते हैं। जिसे लोग काफी पसंद करते हैं। गया के कारीगर के हाथों के बने तिलकुट का स्वाद ही अलग होता है। चापड़ी, कटोरी, गुल्लक, काजू, तिल पापड़ी, साथ ही साथ खोवा का भी तिलकुट तैयार किया जाता है। तिलकुट के दर्जनों वेरायटी हो रहा तैयार :मकर संक्रांति को लेकर विभिन्न प्रकार के तिलकुट बनाने का काम भी बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है। विभिन्न स्वाद वाले तिलकुट लोगों के सेहत के अनुसार बनाने का प्रचलन बढ़ने लगा है।तिलकुट की बिक्री का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र एक महीने के व्यवसाय में लगभग एक हजार क्विंटल तिलकुट की खपत होती है। तिलकुट का बाजार चमकने का ही परिणाम है इस मौसम के आने का व्यापारियों को इंतजार रहता है। ठेले लगाकर कारोबार करने वाले भी फायदेमंद कारोबार होने से इस समय का बेसब्री से इंतजार करते हैं। दिसंबर महीने से शुरू यह व्यवसाय मकर संक्रांति के बाद तक पूरे जनवरी महीने और फरवरी में भी कुछ समय तक रहता है। गया और टेकारी के कारीगर तिलकुट निर्माण में काफी सिद्धहस्त होते हैं। इसलिए वहां के कारीगर को बुलाकर तिलकुट बनवाया जाता है।दो दर्जन प्रकार से अधिक तिलकुट बनाए जाते हैं।

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