saharsa lack of rain bad effect on farming - सहरसा में बारिश नहीं होने से खेतों में पड़ने लगी दरारें DA Image
20 नबम्बर, 2019|2:13|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सहरसा में बारिश नहीं होने से खेतों में पड़ने लगी दरारें

जिले में अब तक धान की खेती के लिए बिचड़ा नहीं रोपा जा रहा है। मानसूनी बारिश के इंतजार में किसान परेशान हैं। तपती धूप और मौसम की बेरूखी से खेतों में दरारें पड़ने लगी है। जिले के सभी प्रखंडों में कमोबेश यही स्थिति है। मौसम की बेरूखी से धान का बिचड़ा डालने का समय धीरे-धीरे किसानों के हाथों से निकलता जा रहा है। इससे किसान काफी चिंतित हो रहे हैं।

सिमरी बख्तियारपुर से सं.सू. के अनुसार तपती धूप और मौसम की बेरुखी से धान का बिचड़ा डालने का समय धीरे-धीरे किसानों के हाथों से निकलता जा रहा है। इससे किसान काफी चिंतित हो रहे हैं। लिहाजा इस चिंतन में बारिश नहीं होने के कारण धान का बिचड़ा लगाने में किसानों को पसीने छूट रहे हैं। संपन्न किसान तो अपने क्षमता के बल पर किसी तरह से तो धान का बिचड़ा डाल रहे हैं लेकिन मध्यम व निम्नवर्गीय किसान अब भी आसमान से बारिश टपकने के इंतजार में बिचड़ा नहीं डाल पाये हैं। अभी भी क्षेत्रों में अनुमानत: 80 फीसदी किसान बारिश होने के इंतजार में बिचड़ा नहीं डाल पाया है। जहां क्षेत्रों में अभी खेतों में हर जगह बिचड़ा ही बिचड़ा नजर आना चाहिए था वहीं अभी खाली पड़ी नजर आती है। वहीं तापमान में लगातार वृद्धि होने के कारण खेतों में डाले गए धान के बिचड़े को बचाने के लिए किसानों को अभी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। हाल यह है कि किसानों को प्रतिदिन निजी साधन से धान के बीज का पटवन करना पड़ रहा है। किसान मो अफसर आलम, राजेन्द्र भगत, मनोव्वर आलम सहित अन्य किसानों ने बताया कि इस बार पिछले साल से अधिक परेशानी हो रही है। पिछले साल रोहिणी नक्षत्र में बारिश हुई थी, जिसके कारण धान का बिचड़ा डालने में थोड़ी सहुलियत हुई थी लेकिन इस बार मौसम के बेरूखी ने किसानो के उम्मीदों को पानी फेर रहा है। बिचड़ा डाले खेतों में दरारें पड़ गई है। पटवन के कुछ ही घंटों बाद खेत फिर से सूख जा रही है। ऐसी स्थिति से किसानों को इन्द्रदेवता की मेहरबानी पर टिकी दिख रही है उम्मीदें।

इधर कृषि विभाग की मानें तो सिमरी बख्तियारपुर में इस बार 6 हजार हेक्टेयर तो बनमा ईटहरी प्रखंड में करीब 32 सो हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य है। लेकिन स्थिति भयावह दिखने से पिछले साल की अपेक्षा बिचड़ा डाला हुआ खेत कम नजर आ रहा है।

सत्तर कटैया से ए.सं. के अनुसार बारिश नहीं होने से किसान हलकान और परेशान हैं। बारिश के अभाव में किसान द्वारा धान का बिचड़ा अभीतक खेतों में नहीं गिराया गया है। किसानों ने बताया कि धान का बिचड़ा गिराने के लिए खेत पूरी तरह से तैयार है लेकिन तेज धूप और बारिश के कारण अभीतक बिचड़ा नहीं गिरा सका हूं। किसान हर सुबह इस आश से सोकर उठता है कि आज मौसम का मिजाज बदलेगा और इन्द्र भगवान की कृपा से झमाझम बारिश होगी लेकिन सुबह की हर आशायें शाम होते होते निराशा में तब्दील हो जाती है। लाचार और बेबस किसानों को अब यह समझ में नहीं आ रहा है वह अब करे तो क्या करे।

पतरघट से ए.सं. के अुनसार प्रखंड क्षेत्र में बारिश के इंतजार में किसान धान का बिचड़ा गिराने की प्रतीक्षा में निराश हो रहे हैं। किसान धान का बिचड़ा समय पर नहीं गिरा सके। लाचार होकर अब पम्पसेट से खेत में पानी देकर बिचड़ा गिराना प्रारंभ किया है। जो किसान पहले धान का बिचड़ा गिरा चूके है। सूख रहे उस बिचड़ा को बचाने में परेशान दिख रहे हैं। किसानों पर गगनदेव की कृपा होने से आगे धान की अच्छी फसल होने की उम्मीद जताई जा रही हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:saharsa lack of rain bad effect on farming