
खाद्यान्न कालाबाजारी का शक गहराया, बीएसएफसी गोदाम सील, जांच के घेरे में कई सवाल
सौरबाजार में खाद्यान्न कालाबाजारी के संदेह में एक ऑटो पकड़ा गया, जिसमें चावल भरा हुआ था। चालक ने कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं दिखाया। बीएसएफसी गोदाम को सील किया गया है और जांच जारी है। स्थानीय लोग इस कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि बिना कागजात के खाद्यान्न की आवाजाही से बड़े पैमाने पर कालाबाजारी का खतरा हो सकता है।
सौरबाजार, संवाद सूत्र। सौरबाजार में खाद्यान्न कालाबाजारी को लेकर शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई सामने आई, जिसने आपूर्ति प्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने संदेह के आधार पर चावल से भरे एक ऑटो को सौरबाजार मुख्य मार्ग के जीरो माइल के पास से पकड़ा। ऑटो को पकड़कर सीधे प्रखंड कार्यालय स्थित बीएसएफसी गोदाम लाया गया, जहां ऑटो चालक से खाद्यान्न संबंधी स्लिप या किसी भी प्रकार का आधिकारिक दस्तावेज मांगा गया। लेकिन चालक कोई भी कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका और असंतोषजनक जवाब देता रहा, जिससे संदेह और गहरा गया। स्थिति तब और संदिग्ध हो गई जब बीएसएफसी गोदाम में एजीएम डोली कुमारी को खोजा गया, लेकिन उनकी जगह उनके पति गोदाम में मौजूद पाए गए।
यह प्रशासनिक व्यवस्था के नियमों के प्रतिकूल है, साथ ही खाद्यान्न की आवाजाही में गड़बड़ी की आशंका को और बल देता है। इस पर जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने तुरंत फोन पर डीएमएसएफसी को सूचना दी और गोदाम को सील करने का निर्देश दिया। निर्देश मिलते ही डीएमएसएफसी संतोष कुमार मौके पर पहुंचे और गोदाम को औपचारिक रूप से सील करवा दिया। इसी बीच एक और गंभीर आरोप सामने आया है कि पकड़े गए ऑटो को एजीएम की मिलीभगत से बिना उचित जांच के ही छोड़ दिया गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, डीएसओ ने स्पष्ट रूप से प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी तथा डीएमएसएफसी को निर्देश दिया था कि चावल से भरे ऑटो को थाना भेजकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए। लेकिन निर्देश के विपरीत ऑटो को छोड़ दिया गया, जिससे पूरे प्रकरण पर संदेह और बढ़ गया है। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बन गया है कि बिना कागजात के इतना माल कैसे चल रहा था और इसमें किसका संरक्षण हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि बीएसएफसी गोदाम से होने वाली अनियमितताओं की शिकायतें पहले भी आती रही हैं, लेकिन इस बार मामला गोदाम के भीतर मौजूद व्यक्ति और पकड़े गए वाहन को छोड़ देने जैसे घटनाक्रमों के कारण और गंभीर हो गया है। कई लोगों का मानना है कि यदि कठोर कार्रवाई न की गई तो यह मामला बड़े स्तर की कालाबाजारी का रूप भी ले सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सब कुछ जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। डीएमएसएफसी संतोष कुमार ने इस संबंध में कहा खाद्यान्न कालाबाजारी के संदेह पर डीएसओ द्वारा एक ऑटो को पकड़ा गया था। प्राप्त निर्देश पर बीएसएफसी गोदाम को सील किया गया है। आगे जांच पूरी होने के बाद ही तथ्य सामने आएंगे। इस बीच स्थानीय लोगों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खाद्यान्न की कालाबाजारी नहीं होती, तो गरीब – मजदूरों को समय पर राशन मिल जाता। कई पंचायतों में पहले से ही शिकायतें हैं कि पात्र उपभोक्ताओं को पूरा खाद्यान्न नहीं मिल रहा है, जबकि सरकारी आवंटन पर्याप्त है। ऐसे में बिना कागजात चलने वाले वाहनों को पकड़ा जाना बड़ी अनियमितता का संकेत है। गोदाम सील होने के बाद खाद्यान्न वितरण प्रभावित हो सकता है। प्रशासन ने अस्थायी रूप से वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की बात कही है ताकि राशन वितरण बाधित न हो। आने वाले दिनों में जांच टीम द्वारा दस्तावेजों, गोदाम के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जाएगी। कुल मिलाकर, यह कार्रवाई खाद्यान्न आपूर्ति प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। जांच पूरी होने तक गोदाम सील रहेगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन कितनी सख्ती से इस मामले को आगे बढ़ाता है और कालाबाजारी की संभावित जड़ तक पहुंच पाता है या नहीं।

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