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महिषी पीएचसी प्रभारी कार्यमुक्त, लिपिक का तबादला

हिन्दुस्तान टीम,सहरसाNewswrap
Sat, 10 Jul 2021 04:11 AM
महिषी पीएचसी प्रभारी कार्यमुक्त, लिपिक का तबादला

सहरसा | नगर संवाददाता

अनियमितता के आरोप में घिरे महिषी पीएचसी प्रभारी डॉ रामाधार सिंह को कार्य मुक्त कर दिया गया है। लिपिक प्रभात कुमार को चेतावनी देते हुए सलखुआ तबादला कर दिया गया है।जबकि रोहित कुमार चौधरी को पीएचसी का नया प्रभारी बनाया गया है।जानकारी के अनुसार महिषी निवासी मधुकांत चौधरी ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए कोसी आयुक्त को आवेदन दिया था। कोसी आयुक्त के सचिव के पत्रांक के आलोक में परिवाद की जांच में पीएचसी प्रभारी के खिलाफ

अनियमितता का आरोप सही पाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रभारी कोसी प्रमंडल के क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं सह सिविल सर्जन डॉ अवधेश कुमार ने बताया कि कार्य मुक्त करते हुए पपत्र क गठित करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। आयुक्त के निर्देश पर कोसी प्रमंडल के क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं ने पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा था। आवेदक के द्वारा पीएचसी प्रभारी व लिपिक के खिलाफ अनियमितता का आरोप लगाया गया था। जिसमें जेनरेटर से विद्युत आपूर्ति के लिए जेनरेटर प्रारम्भ करने की तिथि, समय के साथ ही इसे बंद करने की तिथि व समय का सत्यापन आकस्मिक कर्तव्य पर उपस्थित चिकित्सक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से पृथक डाटा इंट्री आपरेटर व अन्य कर्मियों से भी करवाया गया। मई 20 से लेकर फरवरी 21 तक हर दिन औसतन 12 घंटे विद्युत आपूर्ति बाधित रहना को भी सही नहीं माना गया। जबकि विद्युत फीडर से सत्यापन कराए बिना निजी स्वार्थपूर्ति के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी को विपत्र का भुगतान कर दिया गया। आउटसोर्सिंग एजेंसी को जीएसटी के रूप में भुगतान किया गया लेकिन राशि सरकारी कोष में जमा किया गया इसका कोई प्रमाणपत्र नहीं लिया गया। जयशंकर इंडस्ट्रीयल सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड मुजफ्फरपुर को 1 लाख 80 हजार रूपये की राशि दो अलग-अलग शीर्ष से भुगतान करने के मामले में भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं ए ग्रेड नर्स निधि कुमारी 16 नवंबर से 30 नवंबर 2020 तक अवकाश में थी, स्मिता शालिनी नवंबर 2020 से मातृत्व अवकाश में थी और एएनएम सविता सिन्हा भी 5 अक्टूबर से 30 नवंबर 2020 तक अवकाश में थी ।लेकिन बिना वरीय पदाधिकारियों से स्वीकृति लिए बगैर सभी विपत्र कोषागार में प्रस्तुत किया गया।इसे निजी स्वार्थ के लिए घोर अनियमितता और सरकारी राशि का दुरूपयोग मानते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया था।

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